क्या खतरे में हैं किसान? US ट्रेड डील पर सरकार का सच आया सामने

भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर चल रहे विवाद के बीच कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि इस डील में भारतीय किसानों, डेयरी और पोल्ट्री सेक्टर को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी प्रोडक्ट शामिल नहीं है।

India US Trade Deal
भारत-अमेरिका ट्रेड डील
locationभारत
userअसमीना
calendar08 Feb 2026 11:55 AM
bookmark

भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर देश में लगातार बहस चल रही है। कई लोगों को डर है कि इस समझौते से भारतीय किसानों, डेयरी सेक्टर और कृषि उत्पादों को नुकसान हो सकता है। इन्हीं सवालों के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़ा बयान देकर तस्वीर साफ कर दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वादे के मुताबिक इस ट्रेड डील में किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है। सरकार ने साफ किया है कि जिन चीजों से भारतीय किसान प्रभावित हो सकते थे उन्हें डील से बाहर रखा गया है।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर क्यों मचा है विवाद?

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि इस समझौते से विदेशी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में आ सकते हैं। इसी विवाद के बीच शिवराज सिंह चौहान ने साफ शब्दों में कहा कि यह डील देश को झुकाने वाली नहीं बल्कि भारत के हित में बनाई गई है।

किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं

कृषि मंत्री ने कहा कि पीएम मोदी पहले ही साफ कर चुके हैं कि किसानों को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि खेती और कृषि से जुड़े ऐसे किसी भी प्रोडक्ट को ट्रेड डील में शामिल नहीं किया गया है जिससे भारतीय किसानों को घाटा हो।

ये कृषि उत्पाद US ट्रेड डील से पूरी तरह बाहर

शिवराज सिंह चौहान के मुताबिक इस ट्रेड डील में सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, अनाज, तिलहन, इथेनॉल और तंबाकू जैसे अहम उत्पाद शामिल नहीं हैं। इन सभी पर अमेरिका को किसी भी तरह की टैरिफ छूट नहीं दी गई है।

डेयरी और पोल्ट्री सेक्टर पूरी तरह सुरक्षित

डेयरी और पोल्ट्री को लेकर किसानों की चिंता सबसे ज्यादा थी। इस पर मंत्री ने साफ किया कि दूध, दही, छाछ, मक्खन, घी, पनीर, चीज, क्रीम, बटर ऑयल जैसे किसी भी डेयरी प्रोडक्ट का भारत में इंपोर्ट नहीं होगा। पोल्ट्री सेक्टर भी पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है।

फल और दालें भी ट्रेड डील से बाहर

सरकार ने केले, स्ट्रॉबेरी, चेरी, खट्टे फल, हरी मटर, काबुली चना और मूंग जैसी फसलों को भी इस डील से बाहर रखा है। इसका मकसद साफ है भारतीय किसानों और बागवानी सेक्टर को किसी भी तरह का नुकसान न हो। शिवराज सिंह चौहान ने दो टूक कहा कि अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार नहीं खोला गया है। यानी भारत ने अपने किसानों की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा है और अमेरिका को किसी तरह की विशेष छूट नहीं दी गई।

भारत के कृषि उत्पादों को मिलेगा बड़ा फायदा

जहां एक तरफ अमेरिकी प्रोडक्ट्स को छूट नहीं मिली, वहीं दूसरी तरफ भारत से कई कृषि उत्पाद अमेरिका को जीरो ड्यूटी पर एक्सपोर्ट किए जाएंगे। इससे भारतीय किसानों और निर्यातकों की आमदनी बढ़ने की उम्मीद है। कृषि मंत्री ने बताया कि भारत के मसालों का एक्सपोर्ट 88 फीसदी तक बढ़ गया है। भारत अब दुनिया के करीब 200 देशों को मसाले और उनसे जुड़े प्रोडक्ट्स भेज रहा है जिससे किसानों को सीधा फायदा मिल रहा है।

अमेरिका ने घटाया भारत का टैरिफ

शिवराज सिंह चौहान के अनुसार अमेरिका ने कई भारतीय कृषि उत्पादों पर टैरिफ 50 फीसदी से घटाकर 0 कर दिया है। इससे भारत के एग्रीकल्चर और टेक्सटाइल सेक्टर को मजबूती मिलेगी। इस ट्रेड डील का फायदा सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगा। मंत्री ने कहा कि इससे टेक्सटाइल सेक्टर मजबूत होगा और सेल्फ-हेल्प ग्रुप से जुड़ी महिलाओं की आय और जिंदगी दोनों बेहतर होंगी। अपने बयान के आखिर में शिवराज सिंह चौहान ने साफ कहा कि सरकार ने किसानों के हितों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई कदम नहीं उठाया है। ट्रेड डील को लेकर लगाए जा रहे सभी आरोप बेबुनियाद हैं।

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

कोरियन ड्रामा का असर : छात्रों में क्रेज, इंजीनियरिंग की छात्रा हुई शिकार

रोमांटिक कहानियां, भावनात्मक संवाद, परफेक्ट लुक्स और अलग जीवनशैली युवाओं को अपनी ओर खींचती है। हाल ही में गोरखपुर की एक इंजीनियरिंग छात्रा से जुड़ा मामला इसी बदलते ट्रेंड पर बहस की वजह बना है।

korian
कोरियन ड्रामा
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar07 Feb 2026 07:16 PM
bookmark

korean-Dramas : पिछले कुछ वर्षों में भारत के युवाओं, खासकर कॉलेज छात्रों के बीच कोरियन ड्रामा और के-पॉप का आकर्षण तेजी से बढ़ा है। रोमांटिक कहानियां, भावनात्मक संवाद, परफेक्ट लुक्स और अलग जीवनशैली युवाओं को अपनी ओर खींचती है। हाल ही में गोरखपुर की एक इंजीनियरिंग छात्रा से जुड़ा मामला इसी बदलते ट्रेंड पर बहस की वजह बना है।

जब मनोरंजन आदत बन जाए

बताया गया कि छात्रा रोजाना कई घंटे कोरियन ड्रामा और फिल्में देखने लगी थी। धीरे-धीरे उसकी बोलचाल में विदेशी शब्द आने लगे, पहनावे और मेकअप में भी बदलाव दिखने लगा। यह सब अपने आप में असामान्य नहीं है, क्योंकि युवा अवस्था में लोग नई पहचान तलाशते हैं और पसंदीदा किरदारों से प्रभावित होना स्वाभाविक है। समस्या तब सामने आई जब यह रुचि पढ़ाई और रोजमर्रा की जिम्मेदारियों पर भारी पड़ने लगी। परीक्षा में अंक गिरने लगे और परिवार को चिंता हुई, जिसके बाद काउंसलिंग की जरूरत महसूस की गई।

प्रभाव और लत के बीच की रेखा

किसी संस्कृति, भाषा या कला से प्रभावित होना गलत नहीं है। लेकिन जब कोई व्यक्ति दिन का बड़ा हिस्सा स्क्रीन के सामने बिताने लगे, नींद, पढ़ाई और सामाजिक जीवन प्रभावित होने लगे, तब यह एक चेतावनी बन जाती है। यही फर्क है रुचि और लत के बीच। कोरियन ड्रामा हो या आॅनलाइन गेम ये केवल माध्यम हैं। असल चुनौती है बढ़ता स्क्रीन टाइम, भावनात्मक अकेलापन और युवाओं के पास सीमित रचनात्मक विकल्प।

सिर्फ कंटेंट को दोष देना आसान है

अक्सर ऐसी घटनाओं में सारा दोष विदेशी कंटेंट या मोबाइल फोन पर डाल दिया जाता है। लेकिन यह एकतरफा सोच है। अगर संवाद, मार्गदर्शन और संतुलन मौजूद हो, तो वही कंटेंट सीखने और मनोरंजन का साधन भी बन सकता है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बच्चों और युवाओं को पूरी तरह रोकने के बजाय उनसे खुलकर बात करना ज्यादा प्रभावी होता है। समय तय करना, दिनचर्या बनाना और खेल, संगीत या किताबों जैसे विकल्प देना व्यवहार में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

माता-पिता और संस्थानों की भूमिका

परिवार और शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे समय रहते बदलावों को समझें। चिड़चिड़ापन, अकेलापन या पढ़ाई में लगातार गिरावट जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर काउंसलर या विशेषज्ञ की मदद लेना कमजोरी नहीं, समझदारी है। कोरियन ड्रामा या किसी भी विदेशी संस्कृति से प्रभावित होना न तो अपराध है और न ही मानसिक समस्या। असली सवाल है संतुलन का। जब मनोरंजन जीवन को नियंत्रित करने लगे, तब हस्तक्षेप जरूरी हो जाता है। युवाओं को समझ, समर्थन और सही दिशा मिले तो क्रेज कभी पागलपन नहीं बनता।


संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

अमेरिका ने भारतीय नक्शे में पीओके सहित अक्साई चीन को भारतीय नक्शे में दिखाया

अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय से जुड़े दस्तावेजों में भारत का जो नक्शा सामने आया है, उसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, पूरा जम्मू-कश्मीर और अक्साई चीन को भारत की सीमा के भीतर दर्शाया गया है।

us india
भारत का जो नक्शा सामने आया है, उसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और अक्साई चीन को भारत की सीमा के भीतर दर्शाया गया
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar07 Feb 2026 01:05 PM
bookmark

India-US Relations : भारत और अमेरिका के बीच घोषित अंतरिम व्यापार समझौते के तुरंत बाद एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय से जुड़े दस्तावेजों में भारत का जो नक्शा सामने आया है, उसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, पूरा जम्मू-कश्मीर और अक्साई चीन को भारत की सीमा के भीतर दर्शाया गया है। हालाँकि यह नक्शा किसी औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिये जारी नहीं किया गया, लेकिन इसके निहितार्थ इतने गहरे हैं कि इसे सामान्य तकनीकी दस्तावेज मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

नक्शे में क्या खास है?

इस नक्शे की सबसे अहम बात यह है कि इसमें उन इलाकों को लेकर कोई अलग संकेत या विवादित चिह्न नहीं लगाए गए हैं, जिन्हें आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय नक्शों में संवेदनशील माना जाता है। पीओके जिस पर पाकिस्तान दावा करता है और अक्साई चीन, जिस पर चीन का नियंत्रण है, दोनों को सीधे तौर पर भारत के क्षेत्र में दिखाया गया है। यह तरीका अमेरिका के अब तक के पारंपरिक रवैये से अलग है, जहाँ वह अक्सर इन क्षेत्रों को विवादित बताकर संतुलन बनाए रखता था।

भारत के रुख से मेल खाता कदम

भारत लंबे समय से यह स्पष्ट करता आया है कि जम्मू-कश्मीर और उससे जुड़े सभी क्षेत्र उसके अभिन्न हिस्से हैं और इस पर किसी बाहरी समर्थन की आवश्यकता नहीं है। फिर भी, किसी वैश्विक शक्ति द्वारा उसी दृष्टिकोण को नक्शे के रूप में प्रस्तुत करना राजनयिक स्तर पर एक मजबूत संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की उस लगातार उठाई गई आपत्ति को भी दर्शाता है, जिसमें वह विदेशी नक्शों में अपनी सीमाओं को गलत दिखाए जाने पर विरोध करता रहा है।

पाकिस्तान और चीन के लिए क्या संदेश?

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पाकिस्तान हाल के महीनों में अमेरिका के साथ अपने रिश्तों को फिर से सक्रिय करने की कोशिश कर रहा है। चीन और अमेरिका के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार तेज हो रही है। ऐसे में अमेरिकी दस्तावेज में अक्साई चीन और पीओके को भारत के हिस्से के रूप में दिखाना केवल तकनीकी फैसला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है खासकर इस क्षेत्र में शक्ति संतुलन के संदर्भ में।

व्यापार समझौते से जुड़ा संदर्भ

यह नक्शा उस समय सामने आया है जब भारत और अमेरिका अपने आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में दोनों देशों के बीच व्यापार, टैरिफ और बाजार पहुंच को लेकर मतभेद भी उभरे थे। कुछ समय पहले तक अमेरिका द्वारा भारत पर ऊँचे शुल्क लगाने की बात भी की जा रही थी। ऐसे माहौल में यह नक्शा यह संकेत देता है कि रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी के स्तर पर अमेरिका भारत को अधिक प्राथमिकता दे रहा है।

क्या यह अमेरिकी नीति में स्थायी बदलाव है?

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि अमेरिका ने अपनी आधिकारिक विदेश नीति में कोई औपचारिक बदलाव कर लिया है। लेकिन कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि नक्शे जैसे प्रतीकात्मक दस्तावेज अक्सर बड़े संकेत देने का काम करते हैं, भले ही उन्हें खुले तौर पर घोषित न किया जाए। पीओके और अक्साई चीन को भारत का हिस्सा दिखाने वाला यह अमेरिकी नक्शा सिर्फ एक ग्राफिक नहीं है। यह उस बदलते वैश्विक समीकरण की झलक देता है, जहाँ भारत की रणनीतिक अहमियत बढ़ रही है और क्षेत्रीय मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय नजरिया धीरे-धीरे नया आकार ले रहा है।

संबंधित खबरें