रूस को 10 लाख भारतीय 'स्पेशलिस्ट' की दरकार, लेबर संकट से निपटने को भारत से बड़ी मदद
Labor Crisis In Russia
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 12:52 AM
Labor Crisis In Russia : यूक्रेन युद्ध के तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुके रूस के भीतर अब एक नई चुनौती ने दस्तक दी है, मजदूरों की भारी कमी। इस संकट से निपटने के लिए मास्को ने भारत की ओर रुख किया है। रूसी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि साल के अंत तक रूस 10 लाख भारतीय कामगारों को बुलाने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है। रूस के कॉमर्स और इंडस्ट्री से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी एंद्रेई बेसेडिन के हवाले से बताया गया है कि भारत और रूस के बीच इस मुद्दे पर सहमति बन चुकी है। उन्होंने कहा, भारतीय अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक 10 लाख भारतीय स्पेशलिस्ट रूस के विभिन्न सेक्टर्स में काम करेंगे। इसके लिए येकातेरिनबर्ग में नया भारतीय वाणिज्य दूतावास खोला जाएगा।
पायलट प्रोजेक्ट में भारतियों को मिली मंजूरी
यूक्रेन जंग के चलते रूस में बड़ी संख्या में युवा सैनिकों के रूप में तैनात हैं, जबकि फैक्ट्रियों और इंजीनियरिंग यूनिट्स में योग्य कामगारों की भारी कमी हो गई है। मॉस्को टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, खासकर स्वेर्दलोवस्क क्षेत्र की मेटल और इंजीनियरिंग इंडस्ट्री में श्रमिकों की मांग सबसे ज्यादा है।
मार्च 2025 में मॉस्को की एक रियल एस्टेट कंपनी ने भारतीय निर्माण श्रमिकों को नियुक्त कर एक पायलट प्रोग्राम शुरू किया था। अधिकारियों का कहना है कि अब तक रूस में ज्यादातर काम पूर्व सोवियत संघ के प्रवासी करते रहे हैं जो स्थानीय भाषा में दक्ष हैं, लेकिन भारतीय व श्रीलंकाई कामगारों के साथ अनुभव नया है। सांस्कृतिक और भाषायी चुनौतियों के बावजूद उन्हें भरोसा है कि यह साझेदारी सफल होगी।
कम लागत, उच्च श्रम क्षमता
रूसी कंपनियों का मानना है कि भारतीय श्रमिक अपेक्षाकृत कम वेतन पर भी काम करने को तैयार होते हैं, जिससे प्रोडक्शन लागत को नियंत्रण में रखना संभव हो सकता है। साथ ही, श्रमिकों की उपलब्धता और समर्पण ने भारत को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित कर दिया है। सिर्फ भारत ही नहीं, रूस श्रीलंका और उत्तर कोरिया जैसे देशों से भी कामगारों को बुलाने की योजना पर विचार कर रहा है। एक रूसी अधिकारी ने उत्तर कोरियाई श्रमिकों को 'कुशल और परिश्रमी' बताया। हालांकि शुरुआती अनुभवों में सांस्कृतिक समायोजन और संवाद की कठिनाइयां सामने आ सकती हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच मजबूत राजनयिक संबंधों को देखते हुए इस सहयोग को लेकर रूसी उद्योग जगत में सकारात्मक उम्मीदें हैं।