सऊदी अरब का कफाला सिस्टम क्या है? जानिए इसके नियम, असर और बदलती सच्चाई

सवाल सीधा है कफाला सिस्टम आखिर है क्या, यह किन नियमों पर चलता है, प्रवासी श्रमिकों के लिए इसके मायने क्या हैं और हालिया बदलावों के बाद आज इसकी तस्वीर कितनी बदली है? आइए, इसे विस्तार से समझते हैं।

सऊदी अरब का कफाला सिस्टम
सऊदी अरब का कफाला सिस्टम
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar21 Jan 2026 02:22 PM
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Saudi Arabia : सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को चलाने वाली बड़ी श्रम-शक्ति में लाखों प्रवासी कामगार शामिल हैं खासतौर पर भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और फिलीपींस जैसे देशों से पहुंचे लोग इसमें मुख्य रूप से शामिल है। इन कामगारों की नौकरी, रेजिडेंसी और रोज़मर्रा की कई औपचारिक प्रक्रियाओं पर कफाला सिस्टम (Kafala System) का असर लंबे समय तक निर्णायक रहा है। यही वजह है कि यह व्यवस्था वर्षों से बहस, आलोचना और सुधारों के केंद्र में बनी हुई है। सवाल सीधा है कफाला सिस्टम आखिर है क्या, यह किन नियमों पर चलता है, प्रवासी श्रमिकों के लिए इसके मायने क्या हैं और हालिया बदलावों के बाद आज इसकी तस्वीर कितनी बदली है? आइए, इसे विस्तार से समझते हैं।

कफाला सिस्टम का अर्थ और अवधारणा

अरबी शब्द कफाला का अर्थ होता है जिम्मेदारी या प्रायोजन। सऊदी अरब में यह एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें किसी विदेशी कर्मचारी को देश में काम करने और रहने के लिए किसी स्थानीय नागरिक या कंपनी (जिसे कफील कहा जाता है) का प्रायोजन जरूरी होता है। यानी प्रवासी कर्मचारी का वीज़ा, नौकरी और कई कानूनी प्रक्रियाएं उसी कफील से जुड़ी होती हैं। सरल शब्दों में कहें तो कफाला सिस्टम के तहत कर्मचारी पूरी तरह अपने नियोक्ता पर निर्भर रहता है।

कफाला सिस्टम कैसे काम करता है?

सऊदी अरब में जब कोई विदेशी नागरिक नौकरी के लिए जाता है, तो उसकी एंट्री सिर्फ “जॉब” से नहीं एक स्पॉन्सरशिप सिस्टम से होती है। आमतौर पर कोई सऊदी कंपनी/नियोक्ता उसे स्पॉन्सर करता है, वही वर्क वीजा और इकामा (रेजिडेंसी परमिट) की प्रक्रिया पूरी कराता है। इसके बाद नौकरी बदलने, देश छोड़ने या कई मामलों में दस्तावेज़ी नियंत्रण जैसे फैसलों पर भी नियोक्ता का असर दिखता है। कागज़ों पर यह व्यवस्था प्रवासी श्रमिकों की निगरानी और कानूनी जवाबदेही तय करने के लिए बनी थी, लेकिन वक्त के साथ यही सिस्टम अधिकारों, निर्भरता और शोषण जैसे मुद्दों को लेकर बार-बार सवालों के घेरे में आता रहा है

कफाला सिस्टम से जुड़ी प्रमुख समस्याएं

कफाला सिस्टम पर सबसे तीखी आपत्ति यही रही है कि इसमें पावर का संतुलन पूरी तरह नियोक्ता के पक्ष में झुक जाता है। कई मामलों में कर्मचारी की नौकरी, दस्तावेज़ और आवाजाही सब कुछ एक तरह से मर्जी की मोहर पर टिक जाता है। नतीजा यह हुआ कि बिना अनुमति जॉब बदलने पर रोक, वेतन रोकने या देर से देने की शिकायतें, पासपोर्ट जब्त कर लेना, लंबे काम के घंटे और असुरक्षित/खराब कार्यस्थितियां जैसी समस्याएं बार-बार सामने आईं। ऊपर से देश छोड़ने के लिए एग्जिट परमिट जैसी शर्त ने कई प्रवासी श्रमिकों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। यही वजह है कि मानवाधिकार संगठनों ने इस व्यवस्था को कई बार आधुनिक समय की बंधुआ मजदूरी जैसी संरचना बताकर कड़ी आलोचना की है।

सऊदी अरब में कफाला सिस्टम में हुए सुधार

आलोचनाओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच सऊदी अरब ने पिछले कुछ सालों में कफाला सिस्टम की जकड़न ढीली करने की दिशा में कई ठोस कदम उठाए हैं। Vision 2030 के एजेंडे के तहत श्रम सुधारों को तेज किया गया, ताकि प्रवासी कर्मचारियों की निर्भरता कम हो और अधिकारों की सुरक्षा बढ़े। इन बदलावों में कई श्रेणियों के कर्मचारियों को नौकरी बदलने की अनुमति, नियोक्ता की मंजूरी के बिना एग्ज़िट-रीएंट्री जैसी सुविधा, डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कॉन्ट्रैक्ट सत्यापन और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया, और वेज प्रोटेक्शन सिस्टम (WPS) को मजबूत करना शामिल है। सरकार का दावा है कि इन सुधारों का मकसद श्रमिकों को ज्यादा आज़ादी, पारदर्शिता और कानूनी सुरक्षा देना और कार्यस्थलों पर जवाबदेही तय करना है।

आज कफाला सिस्टम की वास्तविक स्थिति

हालांकि सुधार हुए हैं, लेकिन कफाला सिस्टम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अब भी घरेलू कामगारों और कुछ श्रमिक वर्गों पर इसके नियम सख्ती से लागू होते हैं। यानी यह कहना गलत होगा कि कफाला सिस्टम समाप्त हो चुका है, बल्कि यह धीरे-धीरे सीमित और नियंत्रित किया जा रहा है।

भारतीय कामगारों पर इसका प्रभाव

सऊदी अरब में काम करने वाले भारतीयों की संख्या काफी अधिक है। कफाला सिस्टम के चलते कई भारतीय कामगारों को पहले कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन नए नियमों से अब स्थिति पहले से बेहतर हुई है। फिर भी, नौकरी से पहले कॉन्ट्रैक्ट पढ़ना, सही एजेंसी चुनना और कानूनी जानकारी रखना बेहद जरूरी है। Saudi Arabia


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लोकल हायरिंग पर सऊदी का 60% लॉक: मार्केटिंग में नया नियम लागू

इसके साथ ही इन भूमिकाओं के लिए न्यूनतम वेतन 5,500 सऊदी रियाल (SAR) निर्धारित किया गया है। नए नियम 19 जनवरी से प्रभावी होंगे, जबकि कंपनियों को बदलाव लागू करने के लिए तीन महीने का ट्रांजिशन पीरियड दिया गया है।

सऊदी अरब
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userअभिजीत यादव
calendar20 Jan 2026 04:33 PM
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Saudi Arabia : सऊदी अरब ने निजी क्षेत्र में स्थानीय नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मानव संसाधन और सामाजिक विकास मंत्रालय (HRSD) ने मार्केटिंग और सेल्स सेक्टर की नौकरियों में सऊदीकरण (Saudization) की दर 60% करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही इन भूमिकाओं के लिए न्यूनतम वेतन 5,500 सऊदी रियाल (SAR) निर्धारित किया गया है। नए नियम 19 जनवरी से प्रभावी होंगे, जबकि कंपनियों को बदलाव लागू करने के लिए तीन महीने का ट्रांजिशन पीरियड दिया गया है।

क्या है सऊदीकरण?

सऊदी सरकार ने ‘सऊदीकरण’ नीति के तहत निजी कंपनियों में स्थानीय युवाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए मार्केटिंग और सेल्स सेक्टर पर सीधा फोकस किया है। नए प्रावधानों के मुताबिक, जिन प्रतिष्ठानों में इन भूमिकाओं में कम से कम 3 कर्मचारी काम कर रहे हैं, वहां 60% पद सऊदी नागरिकों से भरना अनिवार्य होगा। साथ ही मार्केटिंग से जुड़े पदों पर न्यूनतम 5,500 रियाल वेतन तय किया गया है, ताकि सिर्फ भर्ती ही नहीं बल्कि सम्मानजनक कमाई भी सुनिश्चित हो। इस दायरे में मार्केटिंग/एडवरटाइजिंग मैनेजर, विज्ञापन प्रतिनिधि, ग्राफिक व विज्ञापन डिजाइनर, PR स्पेशलिस्ट-मैनेजर, मार्केटिंग स्पेशलिस्ट और फोटोग्राफर जैसे पद शामिल हैं। वहीं, सेल्स सेक्टर में भी सेल्स मैनेजर, रिटेल-होलसेल प्रतिनिधि, आईटी/कम्युनिकेशन उपकरण बिक्री विशेषज्ञ, कमर्शियल स्पेशलिस्ट और ब्रोकरेज/माल दलाल जैसी भूमिकाएं नियम के दायरे में आएंगी। कंपनियों को नए लक्ष्य हासिल करने के लिए तीन महीने की तैयारी अवधि दी गई है

HRSD ने खोला मदद का पूरा रास्ता

HRSD का कहना है कि यह सिर्फ नियम थोपने की कवायद नहीं, बल्कि निजी कंपनियों को साथ लेकर चलने की रणनीति है। मंत्रालय के मुताबिक, कंपनियों को भर्ती प्रक्रिया से लेकर ट्रेनिंग, स्किल-अपग्रेडेशन, कर्मचारी विकास और जॉब स्टेबिलिटी बढ़ाने तक सरकार के कई सपोर्ट प्रोग्राम्स का सीधा फायदा मिलेगा। इतना ही नहीं, ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट फंड (Hadaf) के जरिए चल रही सऊदीकरण पहलों में निजी क्षेत्र को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि योग्य सऊदी टैलेंट तक पहुंच आसान हो और नियुक्तियों के बाद कर्मचारियों को टिकाए रखने में भी मदद मिल सके। कुल मिलाकर, सरकार का संदेश साफ है लोकल हायरिंग के लक्ष्य के साथ-साथ कंपनियों को जरूरी संसाधन और सिस्टम सपोर्ट भी दिया जाएगा।

लेबर मार्केट एनालिसिस से तय हुए नए लक्ष्य

मंत्रालय का दावा है कि मार्केटिंग और सेल्स सेक्टर में सऊदीकरण से जुड़ा यह फैसला किसी “अनुमान” पर नहीं, बल्कि लेबर मार्केट के डेटा-आधारित विश्लेषण पर लिया गया है। HRSD के मुताबिक, इन क्षेत्रों में नौकरी चाहने वाले सऊदी युवाओं की उपलब्धता और आने वाले समय की इंडस्ट्री डिमांड को सामने रखकर नए लक्ष्य तय किए गए हैं। सरकार को भरोसा है कि इस कदम से निजी क्षेत्र में क्वालिटी जॉब्स का दायरा बढ़ेगा, बाजार और प्रतिस्पर्धी व आकर्षक बनेगा, और कर्मचारियों के लिए स्थायी रोजगार की नींव मजबूत होगी। वहीं, नियमों के पालन में कंपनियों को दिक्कत न हो, इसके लिए मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रियात्मक गाइडलाइन भी जारी की है। Saudi Arabia

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स्मार्टफोन से शॉपिंग तक: सऊदी में ई-कॉमर्स का भविष्य कितना बड़ा?

अगले कुछ वर्षों में ऑनलाइन खरीदारी का विस्तार महज सेल तक सीमित नहीं रहेगा यह उपभोक्ताओं की पसंद, रिटेल की प्रतिस्पर्धा और डिलीवरी नेटवर्क के पूरे ढांचे को नए सिरे से परिभाषित करेगा।

सऊदी अरब
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userअभिजीत यादव
calendar19 Jan 2026 03:27 PM
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Saudi Arabia : डिजिटल क्रांति ने दुनिया के कारोबार का नक्शा फिर से खींच दिया है और सऊदी अरब इस बदलाव की रफ्तार पकड़ने वाले अग्रणी देशों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। Vision 2030 के तहत तेल पर निर्भरता घटाकर अर्थव्यवस्था को बहुआयामी बनाने की जो रणनीति चल रही है, उसमें ई-कॉमर्स सिर्फ एक नया बिजनेस मॉडल नहीं, बल्कि आर्थिक विविधीकरण की रीढ़ बनता दिखाई दे रहा है। अगले कुछ वर्षों में ऑनलाइन खरीदारी का विस्तार महज सेल तक सीमित नहीं रहेगा यह उपभोक्ताओं की पसंद, रिटेल की प्रतिस्पर्धा और डिलीवरी नेटवर्क के पूरे ढांचे को नए सिरे से परिभाषित करेगा।

डिजिटल परिवर्तन और उपभोक्ता व्यवहार

सऊदी अरब की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है और यही वर्ग डिजिटल दुनिया का सबसे तेज़ उपभोक्ता भी बन चुका है। इंटरनेट और स्मार्टफोन अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहे; डिजिटल पेमेंट, शॉपिंग ऐप्स और सोशल मीडिया ने ऑनलाइन खरीदारी को रोज़मर्रा की आदत में बदल दिया है। आज ग्राहक सिर्फ “सस्ता” नहीं खोजता, वह सुविधा, भरोसा, तेज डिलीवरी और बेहतर यूज़र एक्सपीरियंस को पहली शर्त मानता है।

Vision 2030 और ई-कॉमर्स का संबंध

Vision 2030 का मुख्य उद्देश्य सऊदी अर्थव्यवस्था को आधुनिक और विविध बनाना है। ई-कॉमर्स इस लक्ष्य में अहम भूमिका निभा रहा है क्योंकि यह डिजिटल इकोनॉमी, स्टार्टअप कल्चर और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देता है। सरकार द्वारा बिजनेस रजिस्ट्रेशन, टैक्स स्ट्रक्चर और विदेशी निवेश नियमों में किए गए सुधारों ने ई-कॉमर्स को तेज़ी से बढ़ने का अवसर दिया है।

स्थानीय और वैश्विक कंपनियों की भागीदारी

सऊदी अरब का ई-कॉमर्स बाजार अब केवल स्थानीय कंपनियों तक सीमित नहीं रहा। वैश्विक ई-कॉमर्स ब्रांड्स और क्षेत्रीय प्लेटफॉर्म्स यहाँ निवेश कर रहे हैं। इसके साथ ही स्थानीय स्टार्टअप्स भी नए और इनोवेटिव मॉडल के साथ उभर रहे हैं। यह प्रतिस्पर्धा उपभोक्ताओं के लिए बेहतर सेवाएँ और कम कीमतें लेकर आ रही है, वहीं व्यवसायों को गुणवत्ता और तकनीक में निवेश के लिए प्रेरित कर रही है।

लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी इकोसिस्टम

ई-कॉमर्स की सफलता का सबसे अहम आधार मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क होता है। सऊदी अरब इस क्षेत्र में भारी निवेश कर रहा है। स्मार्ट वेयरहाउस, ऑटोमेशन, ड्रोन डिलीवरी और तेज़ ट्रांसपोर्ट सिस्टम भविष्य की योजनाओं का हिस्सा हैं। रेगिस्तानी भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद, आधुनिक लॉजिस्टिक्स समाधान ई-कॉमर्स को देश के दूर-दराज़ इलाकों तक पहुँचाने में मदद कर रहे हैं।

डिजिटल पेमेंट और फिनटेक का योगदान

ई-कॉमर्स के विस्तार में डिजिटल पेमेंट सिस्टम की भूमिका निर्णायक है। सऊदी अरब में कैशलेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा दिया जा रहा है। मोबाइल वॉलेट, ऑनलाइन बैंकिंग और सुरक्षित भुगतान गेटवे ने उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाया है। फिनटेक कंपनियाँ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर आसान, तेज़ और सुरक्षित भुगतान समाधान विकसित कर रही हैं, जिससे ऑनलाइन खरीदारी का अनुभव बेहतर हो रहा है।

महिला उद्यमिता और घरेलू व्यवसाय

ई-कॉमर्स ने सऊदी अरब में महिलाओं के लिए नए अवसर खोले हैं। घर से संचालित ऑनलाइन स्टोर, सोशल मीडिया आधारित व्यापार और डिजिटल मार्केटप्लेस ने महिला उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनने का मंच दिया है। यह न केवल आर्थिक सशक्तिकरण का साधन है, बल्कि सामाजिक बदलाव का भी संकेत देता है, जो Vision 2030 के उद्देश्यों से मेल खाता है।

चुनौतियाँ और संभावनाएँ

हालाँकि सऊदी अरब में ई-कॉमर्स का भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं। डेटा सुरक्षा, साइबर फ्रॉड, उपभोक्ता विश्वास और रिटर्न मैनेजमेंट जैसे मुद्दे ध्यान मांगते हैं। इसके बावजूद, तकनीकी नवाचार, बेहतर नियामक ढाँचा और उपभोक्ता जागरूकता इन चुनौतियों को अवसर में बदल सकती है। आने वाले वर्षों में Saudi Arabia में ई-कॉमर्स केवल रिटेल तक सीमित नहीं रहेगा। हेल्थकेयर, एजुकेशन, डिजिटल सर्विसेज और B2B सेक्टर में भी ऑनलाइन मॉडल तेजी से बढ़ेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और पर्सनलाइज्ड शॉपिंग अनुभव ई-कॉमर्स को और अधिक उन्नत बनाएंगे। Saudi Arabia

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