यूएन रिपोर्ट में बड़ा खुलासा : 'पहलगाम हमला' लश्कर-ए-तैयबा ने करवाया
United Nations
भारत
चेतना मंच
30 Jul 2025 08:56 PM
United Nations : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध निगरानी टीम की हालिया रिपोर्ट ने पाकिस्तान की एक और करतूत का पदार्फाश कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के पीछे सीधे तौर पर पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का हाथ था। इस हमले में 26 निर्दोष पर्यटक मारे गए थे। अब संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट इस ओर इशारा कर रही है कि यह हमला द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) द्वारा अंजाम दिया गया था, जो लश्कर-ए-तैयबा का ही एक नकाबपोश चेहरा है।
टीआरएफ की भूमिका पर यूएन रिपोर्ट में क्या कहा गया?
22 अप्रैल को हुए हमले के तुरंत बाद टीआरएफ ने घटनास्थल की तस्वीरें साझा करते हुए जिम्मेदारी ली थी। अगले दिन भी संगठन ने इसे दोहराया, लेकिन 26 अप्रैल को टीआरएफ अपने बयान से पलट गया। इसके बाद से न टीआरएफ और न ही किसी अन्य संगठन ने हमले की खुलकर जिम्मेदारी ली। यूएन की रिपोर्ट में एक सदस्य देश के हवाले से कहा गया है कि "टीआरएफ और लश्कर-ए-तैयबा के बीच करीबी संबंध हैं। यह हमला लश्कर की सक्रिय सहायता के बिना संभव नहीं हो सकता था।" एक अन्य देश ने तो टीआरएफ को लश्कर का ही दूसरा नाम बताया है। हालांकि, कुछ सदस्य देशों ने लश्कर के अस्तित्व समाप्त होने की बात भी कही, जिसे भारत ने पहले ही खारिज किया था।
'आपरेशन महादेव' से तीन आतंकी ढेर
इस हमले के बाद भारतीय सुरक्षा बलों ने आपरेशन महादेव के तहत बड़ी कार्रवाई की। सेना की पैरा कमांडो यूनिट ने सैटेलाइट फोन सिग्नल्स के जरिए श्रीनगर के दाचीगाम नेशनल पार्क के पास मुलनार क्षेत्र में मुठभेड़ को अंजाम दिया। इस आॅपरेशन में हमले का मास्टरमाइंड सुलेमान उर्फ आसिफ समेत दो और आतंकवादी मार गिराए गए।
पाकिस्तान को फिर मिला वैश्विक तमाचा
इस रिपोर्ट के बाद एक बार फिर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घिर गया है। भारत पहले ही टीआरएफ को लश्कर का फ्रंट आॅगेर्नाइजेशन बताता रहा है, और अब संयुक्त राष्ट्र की निगरानी समिति की 36वीं अल कायदा रिपोर्ट ने भारत के दावों की पुष्टि कर दी है। संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट से साफ है कि जम्मू-कश्मीर में जारी आतंकवाद में पाकिस्तान की भूमिका अब किसी सबूत की मोहताज नहीं रह गई है। सवाल ये उठता है कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को सिर्फ चेतावनियों से ही टालता रहेगा या अब कोई ठोस कदम भी उठाएगा?