NEET PG 2025 Cut Off में बड़ा बदलाव, सोशल मीडिया पर हंगामा
NEET PG: NEET PG 2025 Cut Off में बड़ी कटौती के बाद माइनस 40 पर्सेंटाइल वाले उम्मीदवारों को भी PG मेडिकल एडमिशन की अनुमति मिल गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के इस फैसले पर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। जानिए नया कट ऑफ क्या है, किन कैटेगरी को फायदा मिलेगा और सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?

भारत के मेडिकल एजुकेशन सिस्टम को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा NEET PG 2025 के क्वालिफाइंग कट-ऑफ में भारी कमी के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। इस फैसले के तहत अब SC, ST और OBC कैटेगरी के कैंडिडेट्स माइनस 40 पर्सेंटाइल तक स्कोर करने के बावजूद MS और MD जैसे पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए योग्य माने जाएंगे। वहीं जनरल और EWS कैटेगरी के लिए भी कट-ऑफ में राहत दी गई है। सरकार का कहना है कि यह फैसला हजारों खाली पड़ी PG मेडिकल सीटों को भरने के लिए लिया गया है लेकिन सवाल यह है कि क्या इससे मेडिकल क्वालिटी पर असर पड़ेगा?
क्या है NEET PG 2025 का नया Cut Off Criteria?
अब तक NEET PG में SC, ST और OBC उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग कट-ऑफ 40वां पर्सेंटाइल था यानी लगभग 800 में से 230–240 अंक। नए आदेश के अनुसार इस कट-ऑफ को घटाकर 0 पर्सेंटाइल कर दिया गया है। इसका मतलब यह हुआ कि निगेटिव मार्क्स लाने वाला कैंडिडेट भी सीट उपलब्ध होने की स्थिति में PG मेडिकल कोर्स में दाखिला पा सकता है। यही बात सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा विवाद का कारण बन रही है।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
दरअसल NEET PG 2025 की एडमिशन प्रक्रिया काफी देरी से चल रही है। अभी तक तीसरी काउंसलिंग भी शुरू नहीं हो पाई है और अनुमान है कि 20,000 से ज्यादा PG मेडिकल सीटें खाली रह सकती थीं। मंत्रालय का मानना है कि डॉक्टरों की कमी और सीटों की बर्बादी रोकने के लिए कट-ऑफ में ढील जरूरी थी। सरकार इसे एक व्यावहारिक समाधान बता रही है।
सोशल मीडिया पर क्यों भड़का गुस्सा?
इस फैसले के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर डॉक्टरों और आम लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। एक डॉक्टर ने लिखा कि यह शायद दुनिया का इकलौता देश है जहां जीवन और मृत्यु से जुड़े पेशे में क्वालिटी से समझौता किया जा रहा है। वहीं एक अन्य यूजर ने कहा कि जो लोग यह पॉलिसी बना रहे हैं वे खुद इन डॉक्टरों से इलाज नहीं कराएंगे बल्कि महंगे अस्पतालों में जाएंगे। आम और गरीब लोग ही इसका असर झेलेंगे।
“5 साल MBBS करने के बाद सब बराबर होते हैं” वाली दलील
कुछ लोगों का मानना है कि MBBS पूरा करने के बाद सभी डॉक्टर एक जैसी बुनियादी ट्रेनिंग पा चुके होते हैं, इसलिए PG में कट-ऑफ कम करना इतना खतरनाक नहीं है। वहीं दूसरी तरफ कई एक्सपर्ट्स कहते हैं कि स्पेशलिस्ट डॉक्टर बनने के लिए मेरिट और स्किल सबसे अहम फैक्टर होने चाहिए क्योंकि PG लेवल पर डॉक्टर सीधे जटिल बीमारियों का इलाज करते हैं।
क्या इससे मरीजों की सुरक्षा पर असर पड़ेगा?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस फैसले से मरीजों की सुरक्षा खतरे में पड़ेगी। आलोचकों का कहना है कि कम मेरिट वाले कैंडिडेट्स को स्पेशलिस्ट ट्रेनिंग देना भविष्य में हेल्थकेयर सिस्टम के लिए जोखिम भरा हो सकता है। वहीं समर्थकों का तर्क है कि PG ट्रेनिंग के दौरान डॉक्टरों की कड़ी निगरानी और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग होती है जिससे क्वालिटी कंट्रोल बना रहता है।
NEET PG Cut Off विवाद का बड़ा सच
यह विवाद सिर्फ कट-ऑफ का नहीं है बल्कि यह भारत के मेडिकल एजुकेशन सिस्टम, आरक्षण नीति और हेल्थकेयर क्वालिटी से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। एक तरफ सीटें खाली जाने का डर है तो दूसरी तरफ मरीजों की जान से जुड़ी चिंताएं हैं। यही वजह है कि NEET PG 2025 Cut Off को लेकर बहस थमने का नाम नहीं ले रही।
भारत के मेडिकल एजुकेशन सिस्टम को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा NEET PG 2025 के क्वालिफाइंग कट-ऑफ में भारी कमी के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। इस फैसले के तहत अब SC, ST और OBC कैटेगरी के कैंडिडेट्स माइनस 40 पर्सेंटाइल तक स्कोर करने के बावजूद MS और MD जैसे पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए योग्य माने जाएंगे। वहीं जनरल और EWS कैटेगरी के लिए भी कट-ऑफ में राहत दी गई है। सरकार का कहना है कि यह फैसला हजारों खाली पड़ी PG मेडिकल सीटों को भरने के लिए लिया गया है लेकिन सवाल यह है कि क्या इससे मेडिकल क्वालिटी पर असर पड़ेगा?
क्या है NEET PG 2025 का नया Cut Off Criteria?
अब तक NEET PG में SC, ST और OBC उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग कट-ऑफ 40वां पर्सेंटाइल था यानी लगभग 800 में से 230–240 अंक। नए आदेश के अनुसार इस कट-ऑफ को घटाकर 0 पर्सेंटाइल कर दिया गया है। इसका मतलब यह हुआ कि निगेटिव मार्क्स लाने वाला कैंडिडेट भी सीट उपलब्ध होने की स्थिति में PG मेडिकल कोर्स में दाखिला पा सकता है। यही बात सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा विवाद का कारण बन रही है।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
दरअसल NEET PG 2025 की एडमिशन प्रक्रिया काफी देरी से चल रही है। अभी तक तीसरी काउंसलिंग भी शुरू नहीं हो पाई है और अनुमान है कि 20,000 से ज्यादा PG मेडिकल सीटें खाली रह सकती थीं। मंत्रालय का मानना है कि डॉक्टरों की कमी और सीटों की बर्बादी रोकने के लिए कट-ऑफ में ढील जरूरी थी। सरकार इसे एक व्यावहारिक समाधान बता रही है।
सोशल मीडिया पर क्यों भड़का गुस्सा?
इस फैसले के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर डॉक्टरों और आम लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। एक डॉक्टर ने लिखा कि यह शायद दुनिया का इकलौता देश है जहां जीवन और मृत्यु से जुड़े पेशे में क्वालिटी से समझौता किया जा रहा है। वहीं एक अन्य यूजर ने कहा कि जो लोग यह पॉलिसी बना रहे हैं वे खुद इन डॉक्टरों से इलाज नहीं कराएंगे बल्कि महंगे अस्पतालों में जाएंगे। आम और गरीब लोग ही इसका असर झेलेंगे।
“5 साल MBBS करने के बाद सब बराबर होते हैं” वाली दलील
कुछ लोगों का मानना है कि MBBS पूरा करने के बाद सभी डॉक्टर एक जैसी बुनियादी ट्रेनिंग पा चुके होते हैं, इसलिए PG में कट-ऑफ कम करना इतना खतरनाक नहीं है। वहीं दूसरी तरफ कई एक्सपर्ट्स कहते हैं कि स्पेशलिस्ट डॉक्टर बनने के लिए मेरिट और स्किल सबसे अहम फैक्टर होने चाहिए क्योंकि PG लेवल पर डॉक्टर सीधे जटिल बीमारियों का इलाज करते हैं।
क्या इससे मरीजों की सुरक्षा पर असर पड़ेगा?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस फैसले से मरीजों की सुरक्षा खतरे में पड़ेगी। आलोचकों का कहना है कि कम मेरिट वाले कैंडिडेट्स को स्पेशलिस्ट ट्रेनिंग देना भविष्य में हेल्थकेयर सिस्टम के लिए जोखिम भरा हो सकता है। वहीं समर्थकों का तर्क है कि PG ट्रेनिंग के दौरान डॉक्टरों की कड़ी निगरानी और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग होती है जिससे क्वालिटी कंट्रोल बना रहता है।
NEET PG Cut Off विवाद का बड़ा सच
यह विवाद सिर्फ कट-ऑफ का नहीं है बल्कि यह भारत के मेडिकल एजुकेशन सिस्टम, आरक्षण नीति और हेल्थकेयर क्वालिटी से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। एक तरफ सीटें खाली जाने का डर है तो दूसरी तरफ मरीजों की जान से जुड़ी चिंताएं हैं। यही वजह है कि NEET PG 2025 Cut Off को लेकर बहस थमने का नाम नहीं ले रही।












