बेटियों के लिए पंजाब सरकार का बड़ा तोहफा, कैसे करें आवेदन?

Ashirwad Scheme: पंजाब सरकार की आशीर्वाद योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी के लिए 51,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। इस योजना का लाभ SC, BC, EWS और विधवा महिलाओं की बेटियों को मिलता है। पात्र परिवार शादी से पहले या शादी के 30 दिनों के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

Girl Child Marriage Scheme
पंजाब आशीर्वाद योजना
locationभारत
userअसमीना
calendar05 Feb 2026 11:43 AM
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बेटी की शादी हर माता-पिता के जीवन का सबसे भावुक और खुशियों भरा पल होता है लेकिन जब परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो तो यही खुशी चिंता में बदल जाती है। शादी के खर्च, रस्में और सामाजिक दबाव कई बार परिवारों को कर्ज तक लेने पर मजबूर कर देते हैं। इसी समस्या को समझते हुए पंजाब सरकार ने आशीर्वाद योजना शुरू की है जिसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी के लिए 51,000 रुपये की सीधी आर्थिक सहायता दी जाती है। इस योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी बेटी की शादी सिर्फ पैसों की कमी की वजह से न रुके।

क्या है पंजाब आशीर्वाद योजना?

पंजाब आशीर्वाद योजना राज्य सरकार की एक सामाजिक कल्याण योजना है जिसका मकसद गरीब और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों को शादी के समय आर्थिक सहारा देना है। इस योजना के तहत सरकार 51,000 रुपये की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर करती है ताकि पैसे का सही और पारदर्शी इस्तेमाल हो सके। यह योजना बेटियों को बोझ नहीं बल्कि सम्मान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक मानने की सोच को मजबूत करती है।

किन परिवारों को मिलता है इस योजना का लाभ?

इस योजना का लाभ राज्य के कई वर्गों की बेटियों को दिया जाता है। इसमें अनुसूचित जाति (SC), पिछड़ा वर्ग (BC), अन्य पिछड़ी जातियां, ईसाई समुदाय की लड़कियां और किसी भी जाति की आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) लड़कियां शामिल हैं। इसके अलावा किसी भी जाति की विधवा महिला की बेटी भी इस योजना के लिए पात्र होती है। इतना ही नहीं अनुसूचित जाति की विधवा या तलाकशुदा महिला यदि दोबारा शादी करती है तो उसे भी आशीर्वाद योजना का लाभ मिलता है।

आशीर्वाद योजना की जरूरी शर्तें क्या हैं?

आशीर्वाद योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी शर्तों को पूरा करना होता है। लड़की की उम्र शादी की तारीख पर कम से कम 18 साल होनी चाहिए। परिवार की कुल सालाना आय 32,790 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। माता-पिता या अभिभावक का पंजाब का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है। इस योजना के तहत एक परिवार की अधिकतम दो बेटियों की शादी के लिए ही आर्थिक सहायता दी जाती है। तीसरी बेटी की शादी के लिए इस योजना का लाभ नहीं मिलता।

कब किया जा सकता है आवेदन?

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आवेदन का समय काफी लचीला रखा गया है। परिवार चाहे तो शादी की तय तारीख से पहले आवेदन कर सकता है। अगर किसी कारणवश पहले आवेदन नहीं हो पाया तो शादी के 30 दिनों के अंदर भी ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। हालांकि, 30 दिन से ज्यादा देरी होने पर आवेदन रिजेक्ट हो सकता है।

घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?

आशीर्वाद योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है जिससे लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। इसके लिए सबसे पहले योजना की आधिकारिक वेबसाइट ashirwad.punjab.gov.in/ashirwad/ पर जाना होगा। होमपेज पर मौजूद Applicant Registration विकल्प पर क्लिक करें। इसके बाद रजिस्ट्रेशन फॉर्म में मांगी गई सभी जरूरी जानकारी सावधानी से भरें। आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने के बाद फॉर्म को सबमिट कर दें।

आवेदन के बाद क्या होगा?

फॉर्म सबमिट होने के बाद संबंधित विभाग द्वारा आवेदन की जांच की जाती है। सभी जानकारी और दस्तावेज सही पाए जाने पर 51,000 रुपये की सहायता राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है। इस तरह सरकार यह सुनिश्चित करती है कि मदद सही व्यक्ति तक पहुंचे।

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32 लाख बुजुर्गों ने क्यों किया रामाश्रय वार्ड में रजिस्ट्रेशन? वजह जानकर चौंक जाएंगे आप

Ramashray Ward Scheme: रामाश्रय वार्ड योजना राजस्थान में बुजुर्गों के लिए एक समर्पित स्वास्थ्य सेवा है। इस योजना के तहत जिला अस्पतालों में विशेष जीरियाट्रिक वार्ड और क्लिनिक स्थापित किए गए हैं। बुजुर्गों को अब बेड पर ही जांच, सैंपल कलेक्शन और रिपोर्ट उपलब्ध होती है।

रामाश्रय वार्ड योजना
रामाश्रय वार्ड योजना क्या है?
locationभारत
userअसमीना
calendar04 Feb 2026 04:38 PM
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राजस्थान में बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से रामाश्रय वार्ड योजना शुरू की गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर यह योजना अब प्रदेश के बुजुर्गों के लिए एक विश्वसनीय और सम्मानजनक स्वास्थ्य सुविधा बन चुकी है। रामाश्रय वार्ड योजना के तहत सभी जिला अस्पतालों में विशेष जीरियाट्रिक वार्ड और क्लिनिक स्थापित किए गए हैं जिनसे अब तक लगभग 32 लाख बुजुर्गों ने लाभ उठाया है।

बुजुर्गों के लिए बेड पर ही जांच और रिपोर्ट

रामाश्रय वार्ड योजना बुजुर्गों के लिए केवल उपचार ही नहीं बल्कि सम्मान, भरोसा और मानसिक शांति भी प्रदान करती है। अब उन्हें बार-बार अस्पताल आने की आवश्यकता नहीं है। योजना में बेड पर ही जांच, सैम्पल कलेक्शन और रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाती है जिससे बुजुर्ग निश्चिंत होकर इलाज करवा सकते हैं। 14 मार्च 2024 से चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के मार्गदर्शन में पूरे राजस्थान के जिला अस्पतालों में इस योजना का शुभारंभ हुआ। इसका उद्देश्य बुजुर्गों को सुगम, समर्पित और सम्मानपूर्वक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना रहा है।

32 लाख से अधिक बुजुर्गों को लाभ

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ के अनुसार, अब तक लगभग 32 लाख बुजुर्गों ने रामाश्रय वार्ड में रजिस्ट्रेशन कराया है। करीब 30 लाख बुजुर्गों ने ओपीडी सेवाओं का लाभ लिया, लगभग 2 लाख बुजुर्गों को आईपीडी सेवाएं उपलब्ध करवाई गईं, 18 लाख लैब टेस्ट यहां किए गए, 44 हजार से अधिक मरीजों को फिजियोथैरेपी सुविधा प्रदान की गई और 8 हजार से अधिक बुजुर्गों को उच्च स्तरीय उपचार के लिए रेफर किया गया।

आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित वार्ड

हर रामाश्रय वार्ड बुजुर्गों की विशेष जरूरतों के अनुसार तैयार किया गया है। प्रत्येक वार्ड में 10 फाउलर बेड, महिला और पुरुष मरीजों के लिए अलग शौचालय, ग्रैब बार और नर्सिंग अलार्म सिस्टम जैसी सुविधाएं मौजूद हैं।

वार्ड में फिजियोथैरेपी उपकरण जैसे शॉर्ट वेव डायाथर्मी, अल्ट्रासाउंड थैरेपी, ट्रांस इलेक्ट्रिक नर्व स्टिमुलेटर और ट्रेक्शन मशीनें उपलब्ध हैं। इसके अलावा, व्हीलचेयर, ट्रॉली और मेडिसिन कैबिनेट जैसी सुविधाएं भी सुनिश्चित की गई हैं।

नोडल अधिकारी और समर्पित स्टाफ

हर रामाश्रय वार्ड में एक नोडल अधिकारी नियुक्त होता है जो वार्ड की समस्त व्यवस्थाओं का संचालन करता है। बुजुर्ग मरीजों की देखभाल के लिए विशेष नर्सिंग स्टाफ और साफ-सफाई कर्मचारी भी मौजूद रहते हैं। आईपीडी में भर्ती बुजुर्गों के लिए विशेषज्ञ सेवाएं सीधे वार्ड में उपलब्ध करवाई जाती हैं। जांच के लिए सैम्पल भी वार्ड से ही लिए जाते हैं और रिपोर्ट सीधे बेड पर ही दी जाती है।

जीरियाट्रिक क्लिनिक और ओपीडी सेवाएं

राजस्थान के सभी जिला और उप-जिला अस्पतालों में बुजुर्गों के लिए जीरियाट्रिक क्लिनिक की सुविधा दी गई है। रजिस्ट्रेशन काउंटर, जांच काउंटर और दवा वितरण केंद्रों पर भी बुजुर्गों के लिए अलग सुविधा सुनिश्चित की गई है। इससे उन्हें लंबी कतारों में खड़े होने की आवश्यकता नहीं पड़ती और सहज रूप से इलाज उपलब्ध होता है।

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महिला एसडीएम ने खुद बुलडोजर चलाकर गिराया अवैध कॉलोनी, मचा हड़कंप

इस दौरान सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) अलका एक्का ने मौके पर मौजूद रहकर न सिर्फ कार्रवाई की निगरानी की, बल्कि खुद मशीन चलाकर अवैध कॉलोनी को ध्वस्त कराया। उनके इस तेवर से इलाके में सक्रिय भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया।

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सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) अलका एक्का
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar03 Feb 2026 06:34 PM
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Illegal Construction : मध्य प्रदेश के पांढुर्णा क्षेत्र में अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। इस दौरान सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) अलका एक्का ने मौके पर मौजूद रहकर न सिर्फ कार्रवाई की निगरानी की, बल्कि खुद मशीन चलाकर अवैध कॉलोनी को ध्वस्त कराया। उनके इस तेवर से इलाके में सक्रिय भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया।

लंबे समय से मिल रही थी अवैध निर्माण की शिकायतें

जानकारी के अनुसार, जिस कॉलोनी पर कार्रवाई की गई, वह बिना किसी वैधानिक अनुमति के विकसित की जा रही थी। न तो कॉलोनी लेआउट स्वीकृत था और न ही संबंधित विभागों से जरूरी मंजूरी ली गई थी। प्रशासन को लंबे समय से इस अवैध निर्माण की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया।

दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा

कार्रवाई के दौरान एसडीएम अलका एक्का ने साफ शब्दों में कहा कि नियमों को ताक पर रखकर कॉलोनी विकसित करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि कोई अवैध निर्माण सामने आता है, तो उसके खिलाफ भी इसी तरह सख्त कार्रवाई की जाएगी।

एसडीएम का दृढ़ रवैया लोगों के बीच चर्चा का विषय बना

इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एसडीएम का दृढ़ और अनुशासित रवैया लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासन का यह कदम उन लोगों के लिए सख्त संदेश माना जा रहा है, जो नियमों की अनदेखी कर जमीनों पर अवैध कब्जे और निर्माण कर रहे हैं। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई उच्च अधिकारियों के निर्देश पर की गई है और जिले में अवैध कॉलोनाइजेशन के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।