न्यू ईयर के दिन ही 1 जनवरी को शहीद हुए थे महान योद्धा गोकुला जाट

1 जनवरी 1670 को शहीद हुए महान योद्धा गोकुल सिंह जाट की वीरता और बलिदान की पूरी कहानी पढ़ें, जिन्होंने मुगल सत्ता के खिलाफ किसान सेना का नेतृत्व किया।

गोकुल सिंह जाट का इतिहास
गोकुल सिंह जाट का इतिहास
locationभारत
userसुप्रिया श्रीवास्तव
calendar01 Jan 2026 12:10 PM
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आज पूरा देश नए साल 2026 के स्वागत के जश्न में डूबा हुआ है। पूरे देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए यह खुशी का पल है, लेकिन इसके साथ ही आज के दिन से जुड़ा एक दुखद और गौरवपूर्ण इतिहास भी है, क्योंकि आज ही के दिन भारत की धरती ने एक ऐसे महान योद्धा को खोया था, जिसकी वीरता से मुगल सत्ता तक कांप उठी थी। यह कहानी है 1 जनवरी 1670 को शहीद हुए जाट वीर गोकुल सिंह जाट की, जिनका बलिदान भारतीय इतिहास के सबसे साहसी अध्यायों में गिना जाता है।

सत्रहवीं शताब्दी का भारत और अत्याचारों का दौर

सत्रहवीं शताब्दी में भारत पर मुगल साम्राज्य का शासन बताया जाता है, लेकिन उस समय की सच्चाई यह थी कि कई क्षेत्रों में मुगल सत्ता कमजोर पड़ चुकी थी। मथुरा और आसपास के इलाकों में आम जनता पर अत्याचार बढ़ते जा रहे थे। धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा था और किसानों से जबरन लगान वसूला जा रहा था। इन्हीं हालातों में मथुरा क्षेत्र के सिनसिनी गांव से एक किसान नेता और योद्धा के रूप में गोकुल सिंह जाट उभरे।

गोकुल सिंह जाट का असहयोग और किसान आंदोलन

साल 1666 के आसपास जब मुगल फौजदार अब्दुन्नवी के सैनिक लगान वसूली के लिए गांव-गांव पहुंचे, तब गोकुल सिंह के आह्वान पर किसानों ने लगान देने से इनकार कर दिया। यह कदम उस दौर में सत्ता के खिलाफ एक बड़ा साहसिक विरोध था। जाट, राजपूत, गुर्जर, यादव, मेव और मीणा समाज के लोग एकजुट होकर गोकुल सिंह के साथ खड़े हो गए। जाति-पाति से ऊपर उठकर यह संघर्ष एक साझा प्रतिरोध बन गया।

सिहोरा का युद्ध और मुगल सेना की हार

मई 1669 में अब्दुन्नवी ने सिहोरा गांव पर हमला किया, जहां गोकुल सिंह मौजूद थे। भीषण युद्ध हुआ, लेकिन गांव के लोगों और गोकुल सिंह की अगुवाई में लड़ी गई किसान सेना के सामने मुगल सैनिक टिक नहीं पाए। इस जीत ने पूरे क्षेत्र में मुगल सत्ता के खिलाफ साहस और आत्मविश्वास भर दिया।

महीनों चला संघर्ष और असफल होती मुगल रणनीति

इसके बाद करीब पांच महीनों तक लगातार युद्ध होते रहे। मुगल सेना की कई रणनीतियां और सेनापति असफल साबित हुए। गोकुल सिंह की युद्ध नीति और उनके साहस का ऐसा प्रभाव पड़ा कि अंत में मुगल पक्ष की ओर से संधि का प्रस्ताव तक भेजा गया, जिसे गोकुल सिंह ने साफ शब्दों में ठुकरा दिया।

औरंगजेब का मथुरा आगमन और निर्णायक युद्ध

नवंबर 1669 में औरंगजेब स्वयं दिल्ली से मथुरा पहुंचा और विशाल सेना के साथ गोकुल सिंह के खिलाफ अभियान चलाया गया। तोपों, हाथियों और प्रशिक्षित सैनिकों से लैस मुगल सेना के सामने गोकुल सिंह के पास केवल किसानों की सीमित और अवैतनिक सेना थी। इसके बावजूद चार दिनों तक चला युद्ध यह दिखाता है कि कैसे सीमित संसाधनों के बावजूद साहस और संकल्प से बड़ी शक्ति का सामना किया जा सकता है।

स्त्रियों का साहस और युद्ध का अंतिम मोड़

इस संघर्ष में केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि स्त्रियों ने भी अद्भुत साहस दिखाया। जब युद्ध का पलड़ा मुगल सेना की ओर झुकने लगा, तब कई स्त्रियों ने जौहर कर अपने सम्मान की रक्षा की। अंत में अतिरिक्त मुगल टुकड़ी के आने से गोकुल सिंह की सेना पराजित हुई।

आगरा में बलिदान और अमर गाथा

गोकुल सिंह, उनके ताऊ उदय सिंह और हजारों साथियों को बंदी बनाकर आगरा ले जाया गया। धर्म परिवर्तन के दबाव को उन्होंने ठुकरा दिया और अमानवीय यातनाएं सहते हुए भी अपने विश्वास से नहीं डिगे। 1 जनवरी 1670 को गोकुल सिंह जाट ने वीरगति पाई। उनका बलिदान आज भी साहस, आत्मसम्मान और स्वतंत्रता की मिसाल है।

इतिहास में उपेक्षा और आज की जरूरत

इतना महान बलिदान देने के बावजूद गोकुल सिंह जाट का उल्लेख इतिहास की मुख्यधारा में बहुत कम मिलता है। वह किसी एक समाज के नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए लड़े थे। नए साल के इस दिन उनका स्मरण हमें यह याद दिलाता है कि भारत की आज़ादी और अस्मिता के लिए अनगिनत गुमनाम नायकों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया।

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भारत में दागी गई “प्रलय” मिसाइल की गूँज पाकिस्तान तक पहुंची

DRDO के वैज्ञानिकों ने एक ही लांचर से एक के बाद एक ‘प्रलय’ मिसाइल दाग कर यह साबित कर दिया है कि भारत के पास युद्ध में ‘प्रलय’ (कोहराम) मचाने वाली बहुत बड़ी शक्ति आ गई है। भारत में दागी गई ‘प्रलय’ मिसाइल की गूँज पाकिस्तान से लेकर चीन तथा अमेरिका तक में महसूस की गई है।

प्रलय मिसाइल
प्रलय मिसाइल
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar31 Dec 2025 05:29 PM
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National News : बुधवार 31 दिसंबर 2025 का दिन भारत के स्वर्णिम इतिहास का एक और शानदार दिन बन गया। भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन DRDO ने बुधवार को बड़ा इतिहास रच दिया। DRDO के वैज्ञानिकों ने एक ही लांचर से एक के बाद एक  ‘प्रलय’ मिसाइल दाग कर यह साबित कर दिया है कि भारत के पास युद्ध में  ‘प्रलय’  (कोहराम) मचाने वाली बहुत बड़ी शक्ति आ गई है। भारत में दागी गई ‘प्रलय’ मिसाइल की गूँज पाकिस्तान से लेकर चीन तथा अमेरिका तक में महसूस की गई है।

DRDO की ‘प्रलय’ मिसाइल बन गई बड़ी मिसाल

आपको बता दें कि भारत के DRDO की ‘प्रलय’ मिसाइल परीक्षण में शत-प्रतिशत सफल साबित हुई है। DRDO ने बुधवार को ओडिशा के पास सुबह करीब 10:30 बजे एक ही लॉन्चर से दो प्रलय मिसाइलों को बहुत कम अंतराल में लगातार (सल्वो लॉन्च) दागा। यह परीक्षण यूजर ट्रायल का हिस्सा था। दोनों मिसाइलें तय ट्रैजेक्टरी पर उड़ीं और सभी उद्देश्यों को पूरा किया। चांदीपुर के इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज के ट्रैकिंग सेंसरों और समुद्र में तैनात जहाज पर लगे टेलीमेट्री सिस्टम ने इसकी पुष्टि की।

क्यों खास है भारत की प्रलय मिसाइल 

भारत की प्रलय मिसाइल एक पूरी तरह स्वदेशी क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है। प्रलय मिसाइल सॉलिड प्रोपेलेंट से चलती है और अत्याधुनिक गाइडेंस और नेविगेशन सिस्टम से लैस है, प्रलय मिसाइल बहुत सटीक निशाना लगा सकती है। इसकी खासियत यह है कि यह अलग-अलग तरह के वॉरहेड ले जा सकती है और विभिन्न लक्ष्यों पर हमला कर सकती है।

भारत के रक्षा मंत्री ने ‘प्रलय’ पर दी बधाई

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को ‘प्रलय’ के सफल परीक्षण पर बधाई दी है। अपने बधाई संदेश के द्वारा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, वायुसेना, थलसेना, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और उद्योग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि लगातार दो मिसाइलों का सफल प्रक्षेपण प्रलय की विश्वसनीयता साबित करता है। DRDO चेयरमैन और रक्षा अनुसंधान एवं विकास सचिव डॉ. समीर वी कामत ने भी टीमों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह सफलता दर्शाती है कि प्रलय मिसाइल जल्द ही सेना में शामिल होने के लिए तैयार है। यह परीक्षण भारतीय रक्षा क्षमता में एक और महत्वपूर्ण कदम है। प्रलय मिसाइल सेना को दुश्मन के गहरे और महत्वपूर्ण ठिकानों पर तेज और सटीक हमला करने की नई ताकत देगी। National News

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बीएमसी चुनाव 2026: संजय निरुपम के बयान से सियासी हलचल

संजय निरुपम ने दावा किया कि बीएमसी चुनाव के बाद महायुति का ही मेयर चुना जाएगा। उन्होंने कहा कि मुंबई का मेयर कौन होगा, इसका फैसला मराठी भाषा बोलने वाले मुंबई के मतदाता करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो भी मेयर बनेगा, वह हिंदू और मराठी भाषी होगा।

Sanjay Nirupam BMC elections 2026
बीएमसी चुनाव 2026 संजय निरुपम (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar31 Dec 2025 05:13 PM
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महाराष्ट्र की बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य में 15 जनवरी 2026 को होने वाले महानगरपालिका चुनाव से पहले सभी दल अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं। इसी बीच शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता और पूर्व सांसद संजय निरुपम का बड़ा बयान सामने आया है, जिसने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है।

अपने बयान में संजय निरुपम ने कहा

बता दें कि जो लोग जिहादियों के दबाव में बुर्का या टोपी पहनने वाले व्यक्ति को मेयर बनाने का सपना देख रहे हैं, उनका यह सपना कभी पूरा नहीं होने दिया जाएगा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी तेज हो गई है और विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाओं का भी इंतजार किया जा रहा है।

15 जनवरी 2026 को होंगे महाराष्ट्र में महानगरपालिका चुनाव

बता दें कि महाराष्ट्र में 15 जनवरी 2026 को सभी प्रमुख महानगरपालिकाओं के चुनाव होने जा रहे हैं। इस चुनाव को लेकर राज्य की राजनीति में कई बड़े गठबंधन देखने को मिल रहे हैं। कई वर्षों बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) एक साथ मिलकर चुनाव लड़ने जा रही हैं, हालांकि बीएमसी को लेकर दोनों दलों के बीच सीटों का बंटवारा अभी तय नहीं हुआ है।

मुंबई चुनाव को लेकर दलों की बढ़ती सक्रियता और बयानबाजी

बता दें कि इसके अलावा शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी भी शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के साथ गठबंधन में चुनाव मैदान में है। वहीं, महाविकास अघाड़ी की सहयोगी रही कांग्रेस ने इस बार अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया है। बीएमसी की 227 सीटों के लिए कांग्रेस ने वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के साथ गठबंधन किया है। बीएमसी चुनाव को लेकर सभी दलों की सक्रियता और लगातार आ रहे बयानों से यह साफ है कि आने वाले महीनों में मुंबई की राजनीति और भी गर्माने वाली है।

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