योगी सरकार का बड़ा फैसला: आधार-बायोमेट्रिक के बिना नहीं होगी रजिस्ट्री

स्टांप एवं पंजीकरण विभाग के मुताबिक, यह नई व्यवस्था मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लागू की जा रही है। इसके तहत क्रेता, विक्रेता और गवाहों का बायोमेट्रिक सत्यापन जरूरी होगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar28 Jan 2026 11:28 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश में जमीन की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री प्रक्रिया अब पहले से ज्यादा सख्त और पारदर्शी होने जा रही है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश में संपत्ति लेन-देन के दौरान होने वाली धोखाधड़ी, फर्जी पहचान और जाली दस्तावेजों पर लगाम कसने के लिए बड़ा फैसला लिया है। 1 फरवरी 2026 से उत्तर प्रदेश के सभी रजिस्ट्री कार्यालयों में जमीन की रजिस्ट्री के दौरान आधार प्रमाणीकरण (Aadhaar Authentication) अनिवार्य कर दिया जाएगा। स्टांप एवं पंजीकरण विभाग के मुताबिक, यह नई व्यवस्था मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लागू की जा रही है। इसके तहत क्रेता, विक्रेता और गवाहों का बायोमेट्रिक सत्यापन जरूरी होगा। सत्यापन के लिए आरडी थंब मशीन (RD Thumb Device) का इस्तेमाल किया जाएगा, जो आधार मानकों के अनुरूप सुरक्षित बायोमेट्रिक स्कैनर मानी जाती है।

उत्तर प्रदेश में क्यों जरूरी हुआ यह बदलाव?

उत्तर प्रदेश में बीते वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आते रहे हैं, जहां फर्जी दस्तावेजों के सहारे जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई और बाद में असली मालिक को कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़े। अब आधार से जुड़े बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के जरिए पहचान की पुष्टि तुरंत हो सकेगी। क्योंकि बायोमेट्रिक डेटा हर व्यक्ति का अलग होता है, इसलिए गलत व्यक्ति के नाम पर रजिस्ट्री कराना बेहद मुश्किल हो जाएगा। इससे यूपी में संपत्ति विवादों की जड़ पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।

पूरे उत्तर प्रदेश में एक साथ लागू होगी व्यवस्था

स्टांप एवं पंजीकरण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नई व्यवस्था प्रदेशभर के सभी रजिस्ट्री दफ्तरों में एक साथ लागू होगी। कई जिलों में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। उदाहरण के तौर पर बरेली में रजिस्ट्री कार्यालयों में आरडी थंब मशीनें लगाने की प्रक्रिया तेज बताई जा रही है। इसी तर्ज पर यूपी के अन्य जिलों में भी आवश्यक उपकरण और तकनीकी व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि 1 फरवरी से व्यवस्था बिना बाधा शुरू हो सके। उत्तर प्रदेश में रजिस्ट्री प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में यह दूसरा बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे पहले जुलाई 2025 में 10 लाख रुपये से अधिक मूल्य की रजिस्ट्री के लिए पैन कार्ड सत्यापन अनिवार्य किया गया था, जिसमें क्रेता-विक्रेता के मोबाइल पर OTP के जरिए पुष्टि होती थी। अब आधार बायोमेट्रिक सत्यापन जोड़कर सिस्टम को और मजबूत किया जा रहा है।

लोगों को जागरूक करेगी यूपी सरकार

स्टांप एवं पंजीकरण विभाग का कहना है कि उत्तर प्रदेश में इस नई व्यवस्था को जमीन पर उतारने से पहले और लागू होने के बाद राज्यभर में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे, ताकि रजिस्ट्री के दौरान किसी भी नागरिक को परेशानी न झेलनी पड़े। यूपी के निबंधन कार्यालयों में आने वाले लोगों को पहले से यह जानकारी दी जाएगी कि रजिस्ट्री के वक्त आधार प्रमाणीकरण और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य होगा। जिनके पास अभी आधार कार्ड नहीं है, उन्हें फरवरी से पहले आधार बनवा लेने की सलाह दी जा रही है, ताकि उत्तर प्रदेश में जमीन की रजिस्ट्री के समय कोई तकनीकी अड़चन या दस्तावेजी रुकावट सामने न आए। UP News

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“विरोध के पीछे जातिवादी सोच”, UGC नियमों पर मायावती का बड़ा बयान

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखते हुए कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिवादी भेदभाव के निराकरण के लिए बनाए गए इस नियम के कुछ प्रावधानों का विरोध सामान्य वर्ग के कुछ लोग अपने खिलाफ भेदभाव या साजिश मानकर कर रहे हैं, जो उचित नहीं है।

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar28 Jan 2026 11:00 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश की सियासत में UGC के नए नियमों को लेकर चल रही बहस अब तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री तथा बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में इक्विटी कमेटी (समता समिति) गठन से जुड़े नए प्रावधानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मायावती ने कहा कि इन नियमों का विरोध केवल जातिवादी मानसिकता वाले लोग कर रहे हैं और इसे घिनौनी राजनीति का हिस्सा बताया। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखते हुए कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिवादी भेदभाव के निराकरण के लिए बनाए गए इस नियम के कुछ प्रावधानों का विरोध सामान्य वर्ग के कुछ लोग अपने खिलाफ भेदभाव या साजिश मानकर कर रहे हैं, जो उचित नहीं है।

मायावती ने दी सरकार को नसीहत

उत्तर प्रदेश के सियासी माहौल में UGC नियमों को लेकर छिड़ी बहस के बीच बसपा सुप्रीमो मायावती ने जोर देकर कहा कि ऐसे संवेदनशील प्रावधान लागू करने से पहले छात्रों, शिक्षकों, विश्वविद्यालय प्रशासन और सामाजिक समूहों सभी को भरोसे में लेना ज्यादा बेहतर होता। उनका तर्क था कि जब संवाद की जगह फैसले अचानक थोपे जाते हैं, तो कई बार गलतफहमियां बढ़ती हैं और सामाजिक तनाव का माहौल बन जाता है। मायावती ने सरकार और संस्थानों को सलाह दी कि नियमों की मंशा और प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट संवाद और भरोसे की नीति अपनाई जाए। साथ ही उन्होंने दलितों और पिछड़ों से अपील की कि वे अपने ही वर्गों में मौजूद स्वार्थी और बिकाऊ नेताओं की भड़काऊ बयानबाजी के झांसे में न आएं। मायावती के मुताबिक, कुछ लोग ऐसे मुद्दों की आड़ लेकर बार-बार राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश करते हैं, इसलिए खासकर यूपी में जनता को सतर्क रहकर तथ्यों के आधार पर फैसला करना चाहिए।

UGC नियमों में क्या है व्यवस्था?

दरअसल, UGC ने 13 जनवरी 2026 को जारी नियमों में उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव की शिकायतों के समाधान के लिए विशेष समितियों, हेल्पलाइन और निगरानी/मॉनिटरिंग टीमों जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य करने की बात कही है। उद्देश्य यह बताया गया है कि खास तौर पर SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों पर संस्थागत स्तर पर कार्रवाई हो और कैंपस में समान अवसर का माहौल बने। उत्तर प्रदेश में यह मामला तेजी से राजनीतिक रंग ले रहा है। एक तरफ इसे सामाजिक न्याय और कैंपस सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है, तो दूसरी तरफ विरोध करने वाले समूह इसे एकतरफा बताकर सवाल उठा रहे हैं। इसी के चलते प्रदेश में बहस और विरोध का माहौल लगातार गरमाया हुआ है। UP News

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UP में UGC नियमों पर सियासी भूचाल, भाजपा महिला मोर्चा का इस्तीफा

UGC के नए नियमों को लेकर उत्तर प्रदेश में सियासी घमासान तेज होता जा रहा है। सवर्ण संगठनों के विरोध के बीच अब भाजपा के भीतर भी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। इसी क्रम में फिरोजाबाद से भाजपा को बड़ा झटका लगा है।

BJP leader Shashi Tomar
UGC नियमों को लेकर BJP नेता शशि तोमर का बड़ा कदम (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar27 Jan 2026 08:56 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए नियमों को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। सवर्ण संगठनों के बाद अब इसका असर भाजपा पार्टी के भीतर भी साफ दिखाई देने लगा है। इसी कड़ी में फिरोजाबाद से भाजपा को बड़ा झटका लगा है, जहां महिला मोर्चा की जिला मंत्री शशि तोमर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

बता दें कि प्राप्त जानकारी के अनुसार शशि तोमर ने मंगलवार (27 जनवरी) को व्हाट्सएप के माध्यम से अपना त्यागपत्र पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भेजा। उन्होंने UGC के नए नियमों को ‘सवर्ण विरोधी’ और ‘काला कानून’ बताते हुए आरोप लगाया कि इससे सवर्ण समाज के बच्चों की शैक्षणिक स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है।

भाजपा की सक्रिय नेता रही हैं शशि तोमर

बता दें कि शशि तोमर ने बताया कि वह चार बार भाजपा की सक्रिय सदस्य रह चुकी हैं और पूर्व में क्षेत्र पंचायत सदस्य के रूप में भी जिम्मेदारी निभा चुकी हैं। छात्र जीवन के दौरान वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़ी रहीं और मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में संगठन के लिए कार्य किया है।

UGC नियमों के बहिष्कार का ऐलान

बता दें कि अपने बयान में शशि तोमर ने UGC के नए नियमों को समाज विशेष के बच्चों को “गुलामी की ओर धकेलने वाला” बताया और इसके पूर्ण बहिष्कार का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि जब क्षत्राणियों ने राष्ट्र की रक्षा के लिए जौहर जैसे बलिदान दिए, तो आज वे अपने बच्चों के भविष्य के लिए संघर्ष क्यों नहीं कर सकतीं। उन्होंने सवर्ण समाज के बच्चों को “गुलामी की जंजीरों” से मुक्त कराने के लिए हर स्तर पर संघर्ष की बात कही।

योगी सरकार पर भरोसा बरकरार

हालांकि शशि तोमर ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा योगी सरकार के विरोध में नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और कार्यों पर भरोसा जताते हुए कहा कि वह आगे भी योगी सरकार का समर्थन करती रहेंगी।

भाजपा की बढ़ीं मुश्किलें

बता दें कि इस घटनाक्रम के बाद फिरोजाबाद की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। वहीं, भाजपा की ओर से अब तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। UGC के नए नियमों को लेकर लगातार हो रहे विरोध और पार्टी नेताओं के इस्तीफों से भाजपा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। UP News

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