मेरठ में सीएम योगी का इशारा बना चर्चा का विषय, संगीत सोम को हटने को कहा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खेल विश्वविद्यालय परियोजना की प्रगति का जायजा लेने पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य हर हाल में 31 मई तक पूरा किया जाए, ताकि निर्धारित समय पर शैक्षणिक सत्र शुरू किया जा सके।

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सीएम योगी आदित्यनाथ
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar22 Jan 2026 06:45 PM
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UP News : मेरठ के सलावा क्षेत्र में निर्माणाधीन खेल विश्वविद्यालय के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक छोटा-सा इशारा राजनीतिक गलियारों में बड़ी चर्चा का कारण बन गया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पूर्व विधायक संगीत सोम को पीछे हटने का संकेत दिया और मौके पर मौजूद एक राज्यमंत्री को अपने पास बुलाया। यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में रिकॉर्ड हो गया और अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

सीएम योगी खेल विश्वविद्यालय परियोजना की प्रगति का जायजा लेने पहुंचे 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खेल विश्वविद्यालय परियोजना की प्रगति का जायजा लेने पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य हर हाल में 31 मई तक पूरा किया जाए, ताकि निर्धारित समय पर शैक्षणिक सत्र शुरू किया जा सके।

सीएम ने संगीत सोम पीछे हटने को कहा

निरीक्षण के समय पूर्व विधायक संगीत सोम मुख्यमंत्री के काफी नजदीक खड़े दिखाई दिए। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने हाथ के इशारे से उन्हें पीछे रहने को कहा और यह स्पष्ट किया कि मंत्री को आगे खड़ा किया जाए। इसके बाद राज्य सरकार में मंत्री दिनेश खटीक आगे आए और मुख्यमंत्री के पास खड़े हो गए, जबकि संगीत सोम पीछे हट गए। यह दृश्य वहां मौजूद मीडिया कैमरों में कैद हो गया। वीडियो सामने आते ही इसे सोशल मीडिया पर साझा किया जाने लगा, जिसके बाद राजनीतिक चचार्एं तेज हो गईं। जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह कदम केवल औपचारिक नहीं था, बल्कि यह प्रशासनिक मर्यादा और पद की गरिमा को रेखांकित करने वाला संदेश भी था।

संगीत सोम पहले भी विवादों में आ चुके हैं

गौरतलब है कि संगीत सोम वर्तमान में न तो विधायक हैं और न ही सरकार में किसी पद पर हैं। ऐसे में सार्वजनिक मंच पर मुख्यमंत्री का यह व्यवहार राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। इससे पहले भी कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के दौरान संगीत सोम को लेकर एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नाराज नजर आए थे और पुलिस अधिकारियों से उनकी बहस की चर्चा हुई थी। इस घटनाक्रम के बाद भाजपा संगठन और प्रशासनिक हलकों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ इसे अनुशासन का स्पष्ट संकेत मान रहे हैं, तो कुछ इसे आने वाले समय की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं। भले ही यह घटना कुछ क्षणों की रही हो, लेकिन इसका असर गहरा माना जा रहा है और मेरठ की राजनीति में इसे एक अहम घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।

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अविमुक्तेश्वरानंद विवाद के बीच सीएम योगी का बड़ा बयान, किसे कहा कालनेमि

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि एक योगी, संत या सन्यासी के लिए निजी संपत्ति का कोई महत्व नहीं होता। धर्म ही उसकी संपत्ति और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है।

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सीएम योगी और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar22 Jan 2026 05:13 PM
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UP News : प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच जारी विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अहम बयान सामने आया है। हरियाणा के सोनीपत स्थित नागे बाबा मंदिर में आयोजित प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दौरान उन्होंने धर्म और राष्ट्र को सर्वोच्च बताते हुए समाज को सतर्क रहने की अपील की।

धर्म की आड़ में साजिश रचने वालों पर हमलामुख्यमंत्री योगी ने कहा कि एक योगी, संत या सन्यासी के लिए निजी संपत्ति का कोई महत्व नहीं होता। धर्म ही उसकी संपत्ति और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कुछ लोग धर्म का मुखौटा पहनकर सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश कर रहे हैं, ऐसे कालनेमियों से समाज को सावधान रहना होगा।

सनातन की मजबूती का प्रतीक बने तीर्थ स्थल

सीएम योगी ने कहा कि आज गुलामी की मानसिकता समाप्त हो चुकी है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या और प्रयागराज में सामाजिक समरसता, संत समाज की शक्ति को दर्शाते हैं। यह परिवर्तन सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रमाण है।प्रशासन और शंकराचार्य के बीच टकराव

मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच विवाद हुआ। आरोप है कि पालकी से उतरने को लेकर पुलिस और शिष्यों के बीच कहासुनी बढ़ी, जिसके बाद शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार हुआ। इससे नाराज होकर शंकराचार्य धरने पर बैठ गए।नोटिस पर नोटिस, बढ़ता जा रहा टकराप्रशासन ने पहले नोटिस में शंकराचार्य पद को लेकर सवाल उठाए, जिसके जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे असंवैधानिक बताया। बाद में मेला क्षेत्र में एंट्री बैन और जमीन निरस्त करने का नोटिस भी भेजा गया। जवाब में उन्होंने कहा कि पालकी परंपरा 2500 वर्ष पुरानी सनातन परंपरा है और इसका अपमान स्वीकार्य नहीं।



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इरफ़ान सिद्दीकी के 5 यादगार शेर

कविता के समानांतर उन्होंने सूचना विभाग में भी काम किया और विभिन्न वरिष्ठ पदों पर जिम्मेदारियाँ निभाईं। पत्रकारिता जगत में भी उनकी मौजूदगी और पहचान रही। हालांकि, कामकाजी व्यस्तता के बावजूद उन्होंने लेखन को कभी पीछे नहीं छोड़ा उनके लिए शायरी सिर्फ अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक निरंतर साधना थी।

इरफ़ान सिद्दीक़ी की यादगार शायरियां
इरफ़ान सिद्दीक़ी की यादगार शायरियां
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar22 Jan 2026 05:49 PM
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Irfan Siddiqui : इरफ़ान सिद्दीकी का नाम उन शायरों में आता है, जिन्होंने क्लासिकल उर्दू की तहज़ीब को संभाले रखते हुए उसे अपने दौर की संवेदना से जोड़ दिया। उनकी शायरी में न तो बनावट का शोर है, न शब्दों का दिखावा बस एक सधी हुई भाषा, पक्के बिंब और ऐसा भाव-प्रवाह जो सीधे दिल तक उतर जाता है। वे परंपरा की रौशनी से रास्ता बनाते हैं, लेकिन उनकी पंक्तियों में आज का सच, आज की बेचैनी और आज की उम्मीद भी धड़कती है। इसी संतुलन ने उन्हें महज़ लोकप्रिय नहीं, बल्कि अपनी पीढ़ी का भरोसेमंद और असरदार शायर बना दिया।

इरफ़ान ने कलम को बनाया जीवन-धर्म

1939 में बदायूं में जन्मे इरफ़ान सिद्दीकी का बचपन ऐसे माहौल में बीता जहाँ इल्म, अदब और साहित्यिक संस्कारों को विशेष महत्व दिया जाता था। यही वजह रही कि कविता की ओर उनका झुकाव बहुत कम उम्र में ही स्पष्ट हो गया। समय के साथ उनकी ग़ज़लें और नज़्में साहित्यिक हलकों में चर्चा का विषय बनने लगीं और उनकी पहचान एक गंभीर, सधे हुए रचनाकार के रूप में स्थापित होती चली गई। कविता के समानांतर उन्होंने सूचना विभाग में भी काम किया और विभिन्न वरिष्ठ पदों पर जिम्मेदारियाँ निभाईं। पत्रकारिता जगत में भी उनकी मौजूदगी और पहचान रही। हालांकि, कामकाजी व्यस्तता के बावजूद उन्होंने लेखन को कभी पीछे नहीं छोड़ा उनके लिए शायरी सिर्फ अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक निरंतर साधना थी।

इरफ़ान सिद्दीकी टॉप 5 शेर 

1 - बदन में जैसे लहू ताज़ियाना हो गया है

उसे गले से लगाए ज़माना हो गया है

2 - उठो ये मंज़र-ए-शब-ताब देखने के लिए

कि नींद शर्त नहीं ख़्वाब देखने के लिए

3 - होशियारी दिल-ए-नादान बहुत करता है

रंज कम सहता है एलान बहुत करता है

4 - बदन के दोनों किनारों से जल रहा हूँ मैं

कि छू रहा हूँ तुझे और पिघल रहा हूँ मैं

5 - सरहदें अच्छी कि सरहद पे न रुकना अच्छा

सोचिए आदमी अच्छा कि परिंदा अच्छा

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