शंकराचार्य के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने लिया यूटर्न

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बाकायदा कहा है कि हम शंकराचार्य के चरणों में प्रणाम अर्पित करते हैं। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान को उत्तर प्रदेश सरकार का यूटर्न माना जा रहा है।

प्रयागराज मेला विवाद
प्रयागराज मेला विवाद
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar23 Jan 2026 03:37 PM
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UP News : शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने यू-टर्न ले लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार के कुछ अधिकारी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को फर्जी शंकराचार्य साबित करने की कोशिश कर रहे थे। अब उत्तर प्रदेश की सरकार शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के चरणों में समर्पित होती हुई नजर आ रही है। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बाकायदा कहा है कि हम शंकराचार्य के चरणों में प्रणाम अर्पित करते हैं। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान को उत्तर प्रदेश सरकार का यूटर्न माना जा रहा है।

शंकराचार्य को क्या बोले उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज मेला में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ प्रशासन द्वारा अभद्रता को लेकर सियासी पारा गरम है। इस मुद्दे पर उठे विवाद के बीच उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से विवाद को समाप्त करते हुए स्नान करने की प्रार्थना की है। साथ ही स्वामी जी के साथ अभद्रता करने वाले अफसरों पर कार्रवाई के मामले में उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। अगर कोई दोषी होगा कार्रवाई भी होगी। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा का यह संस्कार नहीं है कि वह किसी भी संत का अनादर करे। उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को प्रणाम करते हुए अनुरोध किया है कि वह अपना विरोध खत्म करके सँगम में स्नान करें।

शंकराचार्य के मामले में शुरू हुई नई चर्चा

आपको बता दें कि प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के स्नान को लेकर  शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन आमने सामने आ गए थे। मेला प्रशासन ने उन्हें पालकी पर सवार होकर स्नान के लिए जाने से रोक दिया था। इसके बाद शंकराचार्य समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का मुक्की हुई थी। इस घटना से नाराज होकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने धरना शुरू कर दिया था। अब डिप्टी सीएम केशव मौर्य का बयान सामने आया है, जिसे कई मायनों में अहम माना जा रहा है। उन्होंने सम्मानजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए पूरे विवाद को समाप्त करने की बात कही। उनके बयान से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है। UP News

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गोरखपुर की रिवॉल्वर रानी का खौफनाक सच आया सामने

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में मंगलवार शाम जन्मदिन की पार्टी के दौरान फायरिंग करने वाली अंशिका सिंह उर्फ अंतिमा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद सामने आए खुलासों ने न केवल पुलिस महकमे बल्कि आम जनता को भी चौंका दिया है।

The Revolver Queen of Gorakhpur
गोरखपुर से अयोध्या तक फैला था नेटवर्क (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar23 Jan 2026 03:18 PM
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UP News : इंस्टाग्राम पर ‘रिवॉल्वर रानी’ के नाम से चर्चित अंशिका पर हनीट्रैप, ब्लैकमेलिंग और रंगदारी का संगठित नेटवर्क चलाने का आरोप है। घटना कैंट थाना क्षेत्र के सिंघड़िया इलाके की है, जहां अंशिका अपने दोस्तों के साथ सड़क पर जन्मदिन मना रही थी। इसी दौरान दूसरे गुट से कहासुनी हो गई। विवाद बढ़ने पर अंशिका ने पिस्टल निकाल ली। छीना-झपटी के दौरान चली गोली एक युवक के ड्राइवर को जा लगी। घायल को गंभीर अवस्था में एम्स (AIIMS) में भर्ती कराया गया है।

इंस्टाग्राम स्टार से अपराध की दुनिया तक

बता दें कि पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अंशिका सिंह के इंस्टाग्राम पर करीब 75 हजार फॉलोअर्स हैं। वह सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर लोगों को अपने जाल में फंसाती थी। आरोप है कि वह अश्लील वीडियो कॉल के जरिए लोगों को रिकॉर्ड करती और फिर उन्हें वायरल करने की धमकी देकर मोटी रकम वसूलती थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पिछले पांच वर्षों में वह दरोगा, डीसीपी समेत करीब 150 लोगों को ब्लैकमेल कर चुकी है।

पुलिस विभाग में मची खलबली

बता दें कि अंशिका के मोबाइल फोन से बरामद WhatsApp चैट और कॉल डिटेल ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। सूत्रों के अनुसार, वह एक CO, अयोध्या में तैनात DSP और गीडा थाना प्रभारी समेत 15 से अधिक पुलिसकर्मियों के संपर्क में थी। पुलिस अब उन बैंक खातों की जांच कर रही है, जिनके माध्यम से अंशिका के खाते में धनराशि ट्रांसफर हुई। इस बात की भी जांच की जा रही है कि कहीं कुछ पुलिसकर्मी इस अवैध वसूली के खेल में उसके सहयोगी तो नहीं थे।

महंगे शौक बने अपराध की वजह

अंशिका मूल रूप से गोरखपुर के हरपुर बुदहट की रहने वाली है। वह वर्तमान में कैंट थाना क्षेत्र के सिंघानिया इलाके में किराए के कमरे में रह रही थी। लग्जरी लाइफस्टाइल, महंगे कपड़े, नए मोबाइल फोन और दोस्तों के साथ घूमने-फिरने का शौक उसकी कमजोर कड़ी बताया जा रहा है। इन्हीं शौकों को पूरा करने के लिए उसने अपने परिवार से दूरी बना ली और अपराध की राह पकड़ ली।

पुलिस का बयान

एसपी सिटी ने बताया कि अंशिका के खिलाफ हत्या के प्रयास और वाहन चोरी जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं। ब्लैकमेलिंग के आरोपों को लेकर उन्होंने कहा कि अभी तक किसी पीड़ित ने औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है, लेकिन पुलिस सभी डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच कर रही है। यदि कोई पीड़ित सामने आता है तो उसके आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। UP News

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पश्चिम के साथ पूरब से भी उठी उत्तर प्रदेश के बंटवारे की मांग

पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर प्रदेश में अनेक संगठन उत्तर प्रदेश के बंटवारे को लेकर आंदोलन चला रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश निर्माण मोर्चा इस दिशा में लगातार काम कर रहा है।

उत्तर प्रदेश विभाजन की बहस गरम
उत्तर प्रदेश विभाजन की बहस गरम
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar23 Jan 2026 01:22 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश का बंटवारा करने की मांग पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश से भी उठी है। सब जानते हैं कि उत्तर प्रदेश आबादी की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा प्रदेश है। उत्तर प्रदेश को सम्पूर्ण विकास को आधार बनाकर लम्बे अर्से से उत्तर प्रदेश के बंटवारे की मांग चलती रहती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर प्रदेश में अनेक संगठन उत्तर प्रदेश के बंटवारे को लेकर आंदोलन चला रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश निर्माण मोर्चा इस दिशा में लगातार काम कर रहा है।

पश्चिमी निर्माण मोर्चा का संघर्ष बढ़ रहा है आगे

उत्तर प्रदेश के बंटवारे की मांग को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश निर्माण मोर्चा का संघर्ष लगातार आगे बढ़ रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश निर्माण मोर्चा के महासचिव कर्नल सुधीर सिंह का दावा है कि देर जरूर लग रही है किन्तु एक ना एक दिन उत्तर प्रदेश का बंटवारा अवश्य होगा। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश का सही अर्थों में तभी विकास होगा जब उत्तर प्रदेश को कम से कम तीन भागों में बांट दिया जाएगा। कर्नल सुधीर ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में शुरू हुए उत्तर प्रदेश के बंटवारे के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा है कि हम सब लोग एक साथ मिलकर उत्तर प्रदेश का बंटवारा कराने का काम करेंगे।

अमेठी से उठी उत्तर प्रदेश के बंटवारे की मांग

उत्तर प्रदेश का अमेठी क्षेत्र प्रदेश का प्रसिद्ध क्षेत्र है। हाल ही में अमेठी से उत्तर प्रदेश का बंटवारा करके पूर्वांचल राज्य बनाने की मांग खुलकर सामने आई है। एक कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय सिंह और पूर्व प्राविधिक शिक्षा मंत्री डॉ. अमीता सिंह ने साफ कहा कि पूर्वांचल का विकास तभी संभव है, जब उसे अलग राज्य का दर्जा मिले। इस कार्यक्रम में हजारों लोग मौजूद रहे। पूर्वांचल को लेकर यह तर्क दिया जाता है कि यहां विकास की रफ्तार पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य उत्तर प्रदेश की तुलना में धीमी रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और रोजगार के मामले में यह क्षेत्र आज भी पिछड़ा माना जाता है। समर्थकों का कहना है कि अगर पूर्वांचल अलग राज्य बने, तो प्रशासन ज्यादा फोकस के साथ काम कर पाएगा, योजनाएं जमीन पर तेजी से उतरेंगी और स्थानीय समस्याओं का समाधान बेहतर तरीके से होगा।

आसान नहीं है उत्तर प्रदेश का बंटवारा

किसी भी राज्य को बांटना आसान नहीं होता है। यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसमें कई स्तरों पर सहमति और औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। भारत के संविधान में इसके लिए साफ व्यवस्था दी गई है, ताकि फैसले भावनाओं में नहीं, बल्कि कानून के दायरे में हों। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 3 संसद को यह अधिकार देता है कि वह कानून बनाकर किसी राज्य का क्षेत्र घटा-बढ़ा सके, दो या दो से अधिक राज्यों को मिला सके या नया राज्य बना सके. यानी अंतिम फैसला संसद के हाथ में होता है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि राज्य सरकार या जनता की भूमिका नहीं होती है। जब किसी राज्य को बांटने का प्रस्ताव आता है, तो राष्ट्रपति उस प्रस्ताव को संबंधित राज्य की विधानसभा के पास राय के लिए भेजते हैं। विधानसभा इस पर चर्चा करती है और अपनी राय राष्ट्रपति को देती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि विधानसभा की राय बाध्यकारी नहीं होती। यानी अगर विधानसभा सहमत न भी हो, तब भी संसद कानून बना सकती है, लेकिन व्यवहारिक रूप से विधानसभा की राय को काफी महत्व दिया जाता है।  राज्य बंटवारे का सीधा असर वहां रहने वाले लोगों पर पड़ता है। इसलिए इस प्रक्रिया में जनता, सामाजिक संगठनों और अन्य हितधारकों से भी विचार-विमर्श किया जाता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि अलग राज्य की मांग सिर्फ राजनीतिक है या इसके पीछे वास्तविक जरूरत और जनसमर्थन भी है। 

संसद में कैसे पास होता है प्रदेश के बंटवारे का कानून

राज्य बंटवारे से जुड़ा विधेयक संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में पेश किया जाता है। इसे पारित करने के लिए साधारण बहुमत की जरूरत होती है। यानी संविधान संशोधन जैसा भारी बहुमत यहां जरूरी नहीं होता है। यह बात राज्य गठन की प्रक्रिया को अपेक्षाकृत सरल बनाती है।  जब संसद से कानून पास हो जाता है, तो उसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाता है। राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद अधिसूचना जारी होती है और नया राज्य कानूनी रूप से अस्तित्व में आ जाता है। इसी के साथ प्रशासनिक ढांचा, सरकार और अन्य व्यवस्थाएं लागू की जाती हैं।  भारत में इससे पहले भी कई नए राज्य बने हैं। साल 2000 में उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड, मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ और बिहार से झारखंड का गठन हुआ था। 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग होकर तेलंगाना बना। इन उदाहरणों से साफ है कि अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी हो, तो नया राज्य बनना संभव है। UP News

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