एलपीजी सिलेंडर के आज क्या हैं रेट, सप्लाई पर क्या है बड़ा अपडेट?

देशभर में 24 मार्च को घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी फिलहाल उपभोक्ताओं को राहत बनी हुई है और गैस पुराने रेट पर ही मिल रही है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय हालात ने ऊर्जा बाजार की बेचैनी बढ़ा दी है।

गैस सप्लाई पर बड़ा अपडेट
गैस सप्लाई पर बड़ा अपडेट
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar24 Mar 2026 10:56 AM
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LPG Price Today :  देशभर में 24 मार्च को घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी फिलहाल उपभोक्ताओं को राहत बनी हुई है और गैस पुराने रेट पर ही मिल रही है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय हालात ने ऊर्जा बाजार की बेचैनी बढ़ा दी है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बने संकट ने भारत की एलपीजी सप्लाई को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि क्या आने वाले दिनों में रसोई गैस और महंगी हो सकती है।

मध्य पूर्व के तनाव का भारत की गैस सप्लाई पर असर

मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष का असर अब ईंधन आपूर्ति पर भी दिखने लगा है। भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगाता है। अनुमान है कि देश की करीब 60 से 65 फीसदी एलपीजी मांग आयात के जरिए पूरी होती है, और इसमें भी अधिकांश सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आती है। यही वजह है कि इस समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह का संकट भारत के लिए चिंता का कारण बन जाता है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल देश में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और आम उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है।

मार्च की शुरुआत में बढ़े थे गैस के दाम

स्थिति को संतुलित रखने के लिए सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने की रणनीति अपनाई है। इसके तहत रसोई गैस की उपलब्धता प्रभावित न हो, इस पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है। वहीं कमर्शियल उपभोक्ताओं की सप्लाई को सीमित दायरे में रखा गया है, ताकि घरेलू खपत पर कोई दबाव न पड़े। सरकार का मकसद साफ है संकट की घड़ी में आम घरों की रसोई पर असर नहीं पड़ना चाहिए।एलपीजी कीमतों में आखिरी बार बदलाव मार्च की शुरुआत में हुआ था। 7 मार्च को घरेलू सिलेंडर के दाम में ₹60 की बढ़ोतरी की गई थी, जबकि 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹115 बढ़ाई गई थी। इसके बाद से अब तक कोई नई बढ़ोतरी या कटौती नहीं की गई है।

आज देश के बड़े शहरों में एलपीजी के रेट

देश के प्रमुख शहरों में आज घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें इस प्रकार हैं:

नई दिल्ली: घरेलू ₹913 | कमर्शियल ₹1,884.50

मुंबई: घरेलू ₹912.50 | कमर्शियल ₹1,836

कोलकाता: घरेलू ₹939 | कमर्शियल ₹1,988.50

चेन्नई: घरेलू ₹928.50 | कमर्शियल ₹2,043.50

हैदराबाद: घरेलू ₹965 | कमर्शियल ₹2,105.50

लखनऊ: घरेलू ₹950.50 | कमर्शियल ₹2,007

बेंगलुरु: घरेलू ₹915.50 | कमर्शियल ₹1,958

पटना: घरेलू ₹1,002.50 | कमर्शियल ₹2,133.50

सरकार सप्लाई व्यवस्था मजबूत करने में जुटी

एलपीजी सप्लाई को लंबे समय तक स्थिर बनाए रखने के लिए सरकार कई स्तरों पर काम कर रही है। शहरी गैस वितरण परियोजनाओं को तेज किया जा रहा है। पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG को बढ़ावा देने के साथ-साथ सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन प्रोजेक्ट्स को जल्द मंजूरी देने पर भी जोर है। सरकार चाहती है कि बड़े शहरों में कमर्शियल जरूरतों के लिए एलपीजी पर निर्भरता धीरे-धीरे कम हो, ताकि दबाव कम किया जा सके। मौजूदा हालात ने यह भी साफ कर दिया है कि सिर्फ सीमित स्टॉक पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। अभी तेल कंपनियों के पास बहुत कम अवधि का परिचालन स्टॉक रहता है, जो किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट के दौरान पर्याप्त नहीं माना जाता। इसी को देखते हुए सरकार अब एलपीजी के दीर्घकालिक भंडारण और भूमिगत स्टोरेज ढांचे को विकसित करने की योजना पर विचार कर रही है।

भारत नए आयात विकल्पों पर भी कर रहा काम

सप्लाई जोखिम को कम करने के लिए भारत अब पारंपरिक स्रोतों से आगे बढ़कर दूसरे देशों की ओर भी देख रहा है। अमेरिका और कनाडा जैसे देशों से एलपीजी आयात बढ़ाने की दिशा में प्रयास तेज किए जा रहे हैं। इसी रणनीति के तहत भारतीय कंपनियां नए समझौते कर रही हैं, ताकि एक ही क्षेत्र पर निर्भरता कम हो और संकट के समय आपूर्ति बनी रहे। LPG Price Today

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1 अप्रैल से बदलेंगे डिजिटल पेमेंट के नियम, ठगी पर मिलेगी पूरी सुरक्षा

मोबाइल से पेमेंट करना आज आम जीवन का हिस्सा बन चुका है। सब्जी खरीदने से लेकर बड़े स्टोर में शॉपिंग तक, लोग नकद की जगह फोन से भुगतान को ज्यादा आसान मानते हैं। लेकिन इस सुविधा के साथ साइबर अपराध का खतरा भी लगातार बढ़ा है।

नए पेमेंट नियम
नए पेमेंट नियम
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar24 Mar 2026 09:58 AM
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New Rules for Online Payments : देश में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल जिस तेजी से बढ़ा है, उसी रफ्तार से ऑनलाइन फ्रॉड के मामले भी सामने आए हैं। मोबाइल से पेमेंट करना आज आम जीवन का हिस्सा बन चुका है। सब्जी खरीदने से लेकर बड़े स्टोर में शॉपिंग तक, लोग नकद की जगह फोन से भुगतान को ज्यादा आसान मानते हैं। लेकिन इस सुविधा के साथ साइबर अपराध का खतरा भी लगातार बढ़ा है। अब इसी चुनौती से निपटने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने डिजिटल भुगतान व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 1 अप्रैल 2026 से ऑनलाइन ट्रांजैक्शन से जुड़े नियमों में अहम बदलाव लागू होने जा रहे हैं। नई व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहकों का पैसा सिर्फ एक साधारण सुरक्षा प्रक्रिया के भरोसे न रहे। अब डिजिटल पेमेंट के दौरान सुरक्षा की अतिरिक्त परतें जोड़ी जाएंगी, ताकि ठगों के लिए किसी के खाते तक पहुंचना आसान न हो। सबसे बड़ी राहत यह मानी जा रही है कि यदि किसी तकनीकी या सुरक्षा चूक के कारण ग्राहक के साथ फ्रॉड होता है, तो नुकसान की जिम्मेदारी बैंक या संबंधित पेमेंट सेवा प्रदाता को उठानी पड़ सकती है।

दोहरी सुरक्षा के बिना पूरा नहीं होगा ट्रांजैक्शन

नए नियमों के तहत किसी भी ऑनलाइन भुगतान को पूरा करने के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन यानी 2FA जरूरी होगा। इसका मतलब है कि केवल एक ओटीपी या एक जानकारी के आधार पर भुगतान को मंजूरी नहीं दी जाएगी। ग्राहक को कम से कम दो अलग-अलग सुरक्षा चरणों से गुजरना होगा। इसमें पिन, पासवर्ड, ओटीपी, बायोमेट्रिक पहचान, जैसे फिंगरप्रिंट या फेस ऑथेंटिकेशन, जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं।

नई व्यवस्था की खास बात यह है कि इसमें कम से कम एक सुरक्षा तत्व ऐसा होगा जो हर बार बदलता रहेगा। यानी कोई ऐसा कोड या पासवर्ड, जो स्थायी न होकर हर ट्रांजैक्शन के साथ नया बने। इससे यह संभावना काफी कम हो जाएगी कि किसी एक जानकारी के लीक हो जाने पर ठग आपके खाते से पैसा निकाल सकें।

सिर्फ OTP पर भरोसा अब पर्याप्त नहीं

अब तक अधिकतर ऑनलाइन पेमेंट व्यवस्था काफी हद तक ओटीपी आधारित सुरक्षा पर निर्भर रही है। लेकिन समय के साथ साइबर अपराधियों ने लोगों को फंसाने के नए तरीके निकाल लिए हैं। फिशिंग लिंक, फर्जी कॉल, मैलवेयर, स्क्रीन शेयरिंग और सोशल इंजीनियरिंग जैसे हथकंडों के जरिए ओटीपी हासिल करना अब पहले जितना मुश्किल नहीं रह गया है। यही वजह है कि केवल एक मैसेज आधारित सुरक्षा प्रणाली को अब कमजोर माना जाने लगा है। रिजर्व बैंक ने इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था की ओर कदम बढ़ाया है, जिसमें एक से ज्यादा स्तर पर ग्राहक की पहचान और मंजूरी सुनिश्चित की जा सके। इसका सीधा लाभ यह होगा कि डिजिटल पेमेंट पहले के मुकाबले अधिक भरोसेमंद और सुरक्षित बन सकेगा।

फ्रॉड होने पर ग्राहक नहीं रहेगा अकेला

नई गाइडलाइन का सबसे अहम पहलू जवाबदेही तय करना है। अगर किसी ट्रांजैक्शन में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होता और उसका खामियाजा ग्राहक को भुगतना पड़ता है, तो ऐसी स्थिति में पूरी जिम्मेदारी ग्राहक पर नहीं डाली जाएगी। बैंक या संबंधित फिनटेक कंपनी को उसकी जवाबदेही निभानी होगी। यानी यदि फ्रॉड सिस्टम की कमजोरी या सुरक्षा चूक के कारण हुआ है, तो ग्राहक को हुए नुकसान की भरपाई संबंधित संस्था को करनी पड़ सकती है। यह बदलाव आम उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की तरह देखा जा रहा है। इससे बैंकों और डिजिटल पेमेंट कंपनियों पर भी दबाव बढ़ेगा कि वे अपने सुरक्षा तंत्र को पहले से ज्यादा मजबूत, सतर्क और भरोसेमंद बनाएं।

रकम और जोखिम के हिसाब से तय होगी जांच

नई व्यवस्था में सुरक्षा के साथ सुविधा का संतुलन भी बनाए रखने की कोशिश की गई है। रिजर्व बैंक जोखिम आधारित प्रमाणीकरण यानी रिस्क-बेस्ड ऑथेंटिकेशन की व्यवस्था भी लागू कर रहा है। इसका मतलब यह है कि हर ट्रांजैक्शन पर एक जैसी सख्ती नहीं होगी। छोटे और सामान्य भुगतान के लिए प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान रह सकती है, जबकि बड़ी रकम या संदिग्ध गतिविधि वाले ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त जांच की जाएगी। यानी अगर सिस्टम को किसी भुगतान में असामान्य व्यवहार, नई डिवाइस, अलग लोकेशन या ज्यादा रकम जैसी बात दिखती है, तो सुरक्षा की एक और परत सक्रिय हो सकती है। इससे ग्राहकों को रोजमर्रा के छोटे भुगतानों में अनावश्यक परेशानी नहीं होगी और बड़े लेनदेन में सुरक्षा भी मजबूत रहेगी। यह बदलाव सिर्फ देश के भीतर होने वाले डिजिटल भुगतान तक सीमित नहीं रहने वाला। जानकारी के मुताबिक, 1 अक्टूबर 2026 तक इस सुरक्षा ढांचे को अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर भी लागू करने की तैयारी है। इससे विदेशों में किए जाने वाले भुगतान या अंतरराष्ट्रीय डिजिटल खरीदारी भी पहले से ज्यादा सुरक्षित हो सकेगी। New Rules for Online Payments

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सोने-चांदी के दामों में आई भारी गिरावट, जानें आज का ताजा भाव

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता के बीच सोना-चांदी के दामों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। आमतौर पर संकट के समय सुरक्षित निवेश माना जाने वाला सोना इस बार दबाव में नजर आ रहा है।

सोना-चांदी
सोना-चांदी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar23 Mar 2026 09:58 AM
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Gold Silver Price Today : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता के बीच सोना-चांदी के दामों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। आमतौर पर संकट के समय सुरक्षित निवेश माना जाने वाला सोना इस बार दबाव में नजर आ रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि इस साल की अब तक की बड़ी बढ़त भी लगभग खत्म होने की कगार पर पहुंच गई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत करीब 3.8 फीसदी लुढ़ककर 4,320 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई। लगातार आठ कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया है। इसे 1983 के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक कमजोरी भी माना जा रहा है।

आज क्या रहे सोना-चांदी के ताजा भाव

घरेलू वायदा बाजार में भी अंतरराष्ट्रीय कमजोरी का सीधा असर देखने को मिला। एमसीएक्स पर चांदी की कीमत करीब 6 फीसदी या 13,606 रुपये टूटकर 2,13,166 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। वहीं, सोने का भाव भी लगभग 5 फीसदी या 7,115 रुपये गिरकर 1,37,377 रुपये प्रति 10 ग्राम तक फिसल गया। उधर, सिंगापुर बाजार में स्पॉट गोल्ड 3.3 फीसदी की गिरावट के साथ 4,343 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। चांदी भी 3.4 फीसदी टूटकर 65.61 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। प्लैटिनम और पैलेडियम जैसी दूसरी कीमती धातुओं में भी नरमी देखी गई, जिससे साफ है कि दबाव केवल सोने-चांदी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरा बुलियन बाजार इसकी चपेट में है।

आखिर क्यों टूट रहे हैं सोने के दाम?

सोने में आई इस तेज गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बदली हुई बाजार धारणा है। दुनिया के कई केंद्रीय बैंक, खासतौर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व, यह संकेत दे चुके हैं कि फिलहाल ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीद कम है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका मजबूत होती है। ऐसे माहौल में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकते हैं। यही स्थिति सोने के लिए नकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि सोना ब्याज देने वाला एसेट नहीं है। बाजार के जानकारों का कहना है कि सोने में आई इस कमजोरी के पीछे “फोर्स्ड सेलिंग” भी एक बड़ी वजह है। जब शेयर बाजार और अन्य निवेश साधनों में नुकसान बढ़ता है, तो कई निवेशक अपने घाटे की भरपाई के लिए सोना बेचने लगते हैं। 28 फरवरी के बाद से बने युद्ध जैसे हालात के बीच यही पैटर्न देखने को मिला है। निवेशकों की इस मजबूर बिकवाली ने सोने की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बना दिया, जिसकी वजह से गिरावट और तेज हो गई।

ईरान-अमेरिका तनाव से बाजार में बेचैनी

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने को लेकर चेतावनी दिए जाने और ईरान की जवाबी प्रतिक्रिया ने बाजार की बेचैनी को और गहरा कर दिया है। इस टकराव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है। आमतौर पर ऐसे समय में सोना मजबूत होता है, लेकिन इस बार महंगाई, ऊंची ब्याज दरों और बिकवाली के दबाव ने इसकी पारंपरिक सुरक्षित निवेश वाली छवि को कमजोर कर दिया है।

तकनीकी संकेत क्या कहते हैं?

तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, तेज गिरावट के बाद सोना अब “ओवरसोल्ड” जोन में पहुंचता दिख रहा है। 14-दिवसीय आरएसआई इंडिकेटर 30 के नीचे चला गया है, जिसे आमतौर पर जरूरत से ज्यादा बिकवाली का संकेत माना जाता है। ऐसे में संभावना है कि आने वाले समय में सोने में सीमित रिकवरी या शॉर्ट टर्म उछाल देखने को मिले। हालांकि, यह पूरी तरह भू-राजनीतिक हालात, तेल की कीमतों और केंद्रीय बैंकों के रुख पर निर्भर करेगा। Gold Silver Price Today

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