NPS निवेशकों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अब NPS में पेंशन फंड के विकल्प बढ़ेंगे, बैंकों को भी फंड मैनेज करने की अनुमति मिलेगी और निवेशकों पर लगने वाली फीस को नियंत्रित किया जाएगा। नए नियमों से सरकारी कर्मचारी, प्राइवेट नौकरी करने वाले और रिटेल निवेशकों को...

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश करने वाले करोड़ों लोगों के लिए यह खबर किसी राहत भरे तोहफे से कम नहीं है। सरकार और रेगुलेटर लगातार NPS को मजबूत और भरोसेमंद बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसी कड़ी में पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने NPS से जुड़े कई बड़े और अहम सुधारों को मंजूरी दे दी है। इन बदलावों का सीधा फायदा सरकारी कर्मचारियों, प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों, स्वरोजगार करने वालों और रिटेल निवेशकों को मिलेगा। ज्यादा विकल्प, बेहतर गवर्नेंस और कम फीस के जरिए NPS को और ज्यादा निवेशक-अनुकूल बनाया जा रहा है।
अब तक NPS के तहत पेंशन फंड मैनेजमेंट कुछ चुनिंदा संस्थाओं तक सीमित था लेकिन PFRDA के नए फैसले के बाद तस्वीर बदलने वाली है। अब सैद्धांतिक रूप से बैंकों को भी NPS के तहत पेंशन फंड शुरू करने की अनुमति दे दी गई है। इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में देश के बड़े और भरोसेमंद बैंक भी निवेशकों के रिटायरमेंट फंड को मैनेज कर सकेंगे। इससे निवेशकों के पास पहले से ज्यादा विकल्प होंगे और विकल्प बढ़ने से प्रतिस्पर्धा भी तेज होगी जिसका सीधा फायदा सर्विस क्वालिटी और रिटर्न्स पर पड़ेगा।
हालांकि, PFRDA ने साफ कर दिया है कि हर बैंक को पेंशन फंड स्पॉन्सर करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सिर्फ वही बैंक इस दौड़ में शामिल हो सकेंगे जिनकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और जो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के सभी नियमों और मानकों पर खरे उतरते हों। बैंक की पात्रता उसकी नेटवर्थ, मार्केट वैल्यू और कुल वित्तीय मजबूती के आधार पर तय की जाएगी। PFRDA जल्द ही इससे जुड़े विस्तृत नियम और शर्तें जारी करेगा जो नए और मौजूदा दोनों तरह के पेंशन फंड्स पर लागू होंगी।
NPS की निगरानी और गवर्नेंस को और बेहतर बनाने के लिए PFRDA ने ट्रस्ट बोर्ड में तीन अनुभवी और प्रतिष्ठित हस्तियों को शामिल किया है। इनमें SBI के पूर्व चेयरमैन दिनेश कुमार खारा, UTI AMC की पूर्व वरिष्ठ अधिकारी स्वाति अनिल कुलकर्णी और डिजिटल इंडिया फाउंडेशन के को-फाउंडर अरविंद गुप्ता शामिल हैं। खास बात यह है कि दिनेश कुमार खारा को NPS ट्रस्ट बोर्ड का नया चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। इससे निवेशकों के पैसे की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही और मजबूत होने की उम्मीद है।
PFRDA ने पेंशन फंड्स की इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट फीस में भी बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। नया फीस स्ट्रक्चर 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा. इसके तहत सरकारी और गैर-सरकारी सेक्टर के निवेशकों के लिए अलग-अलग फीस तय की जाएगी ताकि सभी वर्गों के हित सुरक्षित रह सकें। मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क के तहत हर स्कीम का कॉर्पस अलग-अलग माना जाएगा। राहत की बात यह है कि 0.015 प्रतिशत की रेगुलेटरी फीस पहले की तरह ही जारी रहेगी।
इन सभी सुधारों का मकसद NPS को ज्यादा पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और लंबे समय तक टिकाऊ बनाना है। ज्यादा पेंशन फंड विकल्प मिलने से निवेशकों को बेहतर फंड मैनेजर्स चुनने का मौका मिलेगा। मजबूत गवर्नेंस से निवेश ज्यादा सुरक्षित होगा और नियंत्रित फीस से लंबे समय में रिटायरमेंट कॉर्पस बड़ा बनेगा। इसका फायदा सरकारी कर्मचारी, प्राइवेट नौकरी करने वाले लोग, स्वरोजगार वाले और युवा वर्कफोर्स सभी को मिलेगा।
PFRDA के ये कदम साफ संकेत देते हैं कि सरकार और रेगुलेटर NPS को भारत की सबसे भरोसेमंद रिटायरमेंट स्कीम बनाना चाहते हैं। बदलते समय और बढ़ती आबादी को देखते हुए रिटायरमेंट प्लानिंग पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गई है। ऐसे में NPS में किए गए ये सुधार निवेशकों को बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा देने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होंगे।