यह योजना वर्ष 2025 से 2031 तक छह वर्षों में चरणबद्ध रूप से लागू की जाएगी। इस परियोजना का उद्देश्य प्रदेश की वायु गुणवत्ता में सुधार करना, नागरिकों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना और पर्यावरण के अनुकूल आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।

UP News : उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में लगातार बढ़ रही वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए एक व्यापक और दीर्घकालिक पहल शुरू करने जा रही है। उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन परियोजना का औपचारिक शुभारंभ जनवरी 2026 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया जाएगा। यह योजना वर्ष 2025 से 2031 तक छह वर्षों में चरणबद्ध रूप से लागू की जाएगी। इस परियोजना का उद्देश्य प्रदेश की वायु गुणवत्ता में सुधार करना, नागरिकों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना और पर्यावरण के अनुकूल आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।
परियोजना के संचालन और निगरानी के लिए एक उच्चस्तरीय शासी निकाय का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता प्रदेश के मुख्य सचिव करेंगे। इसमें प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी शामिल होंगे। हाल में हुई बैठक में अधिकारियों को समयसीमा के भीतर लक्ष्यों को पूरा करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
यह महत्वाकांक्षी योजना विश्व बैंक के सहयोग से क्रियान्वित की जा रही है। विश्व बैंक के निदेशक मंडल ने 10 दिसंबर 2025 को इस परियोजना को मंजूरी प्रदान की। परियोजना की कुल लागत 2,760 करोड़ (304.66 मिलियन अमेरिकी डॉलर) निर्धारित की गई है, जिसमें से 2,714 करोड़ (299.66 मिलियन डॉलर) ऋण के रूप में तथा 45.29 करोड़ (5 मिलियन डॉलर) अनुदान के रूप में प्राप्त होंगे। इस राशि का उपयोग छह वर्षों में चरणबद्ध ढंग से किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन परियोजना भारत की पहली एयरशेड-आधारित वायु गुणवत्ता योजना है। इसे विशेष रूप से इंडो-गंगा मैदान को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जहाँ वायु प्रदूषण की समस्या गंभीर बनी हुई है। परियोजना का आधार आईआईटी कानपुर, आईआईटी दिल्ली और नॉर्वे के वायु अनुसंधान संस्थान द्वारा किए गए वैज्ञानिक अध्ययनों पर रखा गया है।
इस योजना के अंतर्गत लगभग 39 लाख परिवारों को स्वच्छ और सुरक्षित खाना पकाने के विकल्प उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे घरेलू प्रदूषण में कमी आएगी। परिवहन क्षेत्र में लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और गोरखपुर जैसे प्रमुख शहरों में 15,000 इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहन और 500 इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। इसके साथ ही 13,500 अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले भारी वाहनों को हटाकर स्वच्छ तकनीक अपनाने हेतु प्रोत्साहन दिया जाएगा।
औद्योगिक क्षेत्र में संसाधन-कुशल ईंट निर्माण तकनीक, सुरंग भट्टों और स्वच्छ उत्पादन प्रणालियों को बढ़ावा मिलेगा। औद्योगिक समूहों के लिए अलग-अलग स्वच्छ वायु प्रबंधन योजनाएं बनाई जाएंगी। छोटे भाप बॉयलरों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए साझा बॉयलर सुविधाओं की व्यवहार्यता का अध्ययन कर आवश्यक नीतिगत ढांचा तैयार किया जाएगा। वायु प्रदूषण की समस्या को प्रभावी ढंग से कम करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाएगी। सीमा-पार होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए साझा रणनीति अपनाई जाएगी, जिससे कम लागत में अधिक टिकाऊ और प्रभावशाली परिणाम प्राप्त हो सकें।