एक विचार से समझ सकते हैं जीवन का पूरा रहस्य, भगवान बुद्ध ने बताया है
ब्राह्मांड में फैली हुई ऊर्जा को ठीक से समझ लेने तथा प्रकृति के अनुरूप व्यवहार करने से जीवन का पूरा रहस्य समझ में आ जाता है। जो इंसान ब्रह्मांड की ऊर्जा के साथ जुड़ जाता है उसे वह सब कुछ प्राप्त हो जाता है जो वह चाहता है।

Gautama Buddha : भगवान गौतमबुद्ध ने बेहद आसान तरीके से जीवन के बड़े रहस्य का समाधान किया है। भगवान गौतमबुद्ध के बताए गए मार्ग के द्वारा जीवन का रहस्य समझ कर कोई भी इंसान अपने जीवन को पूरी तरह से सार्थक बना सकता है। भगवान गौतमबुद्ध ने बताया है कि वास्तव में आत्मा तथा परमात्मा का पूरा खेल भ्रम है। वास्तव में ब्रह्मांड में फैली हुई ऊर्जा से ही पूरी सृष्टि का संचालन होता है। ब्राह्मांड में फैली हुई ऊर्जा को ठीक से समझ लेने तथा प्रकृति के अनुरूप व्यवहार करने से जीवन का पूरा रहस्य समझ में आ जाता है। जो इंसान ब्रह्मांड की ऊर्जा के साथ जुड़ जाता है उसे वह सब कुछ प्राप्त हो जाता है जो वह चाहता है।
जैसी करनी-वैसी भरनी किसी सजा की चेतावनी नहीं है
भगवान गौतमबुद्ध कहते हैं कि जैसी करनी- वैसी भरनी यह बात हम रोज सुनते हैं। जैसी करनी-वैसी भरनी की बात सुनते ही हमें लगने लगता है कि यह किसी सजा की घोषणा है। हमें लगता है कि जैसे कोई बैठा हुआ है जो हमारे किए गए कार्यों का हिसाब रख रहा है। वास्तव में ऐसी कोई व्यवस्था प्रकृति में नहीं है कि कोई हमारे कार्यों का हिसाब रख रहा हो। असल में ब्रह्मांड में मौजूद ऊर्जा के द्वारा ही सब कुछ संचालित होता है। जिस प्रकार कोई किसान अपने खेल में गेहूं का बीज बोने के बाद आम का पेड़ उगने की कल्पना नहीं कर सकता। उसी प्रकार कोई इंसान प्रकृति के विरूद्ध आचरण करके अपने जीवन को बेहतर बनाने की कल्पना करेगा तो गलत साबित होगा। गेहूं के बीज से कभी आम का पौधा पैदा नहीं हो सकता। इसका अर्थ यह है कि जैसा बीज बोया गया है वैसा ही फल प्राप्त होता है।
इंसान के विचार से बोया जाता है बीज
भगवान गौतमबुद्ध ने बताया है कि इंसान के अंदर चलने वाले विचारों के कंपन को ब्रह्मांड की ऊर्जा ग्रहण करती है। किसी इंसान के विचार जिस प्रकार से होते हैं उस इंसान का जीवन भी उसी प्रकार का बन जाता है। ब्रह्मांड के द्वारा इंसान के विचारों के आधार पर ही उसे सब कुछ प्रदान किया जाता है। जो इंसान अपने विचारों में प्रेम, करूणा, भाईचारा, प्रकृति से लगाव को महत्व देता है उसके जीवन में ब्रह्मांड की शक्ति सब कुछ अच्छा ही अच्छा प्रदान करती है। यहां विचारों का अर्थ आपके द्वारा बोले जाने वाले शब्दों से नहीं है बल्कि आप संमयक भाव से अपने विचारों को देखते हुए जो कुछ भी विचार पैदा करते हैं उन्हीं विचारों से आपका जीवन प्रभावित होता है। साक्षी भाव से उत्तम विचार करने वाला इंसान पूरे मन से जो भी मांगता है उसे वह सब कुछ मिल जाता है जिसकी उसने कल्पना की होती है। भगवान गौतमबुद्ध के इन विचारों का वैज्ञानिकों ने भी समर्थन किया है।
आकर्षण का सिद्धांत भी भगवान गौतमबुद्ध की बात का आधार है
हजारों साल पहले भगवान गौतमबुद्ध ने यह बात कही थी कि आप अपने साक्षी भाव में जो भी मांगते हैं प्रकृति यानि ब्रह्मांड आपको वह सब कुछ दे देता है। इस बात को आधुनिक विज्ञान ने भी स्वीकार कर लिया है। आधुनिक विज्ञान इस व्यवस्था को आकर्षण का सिद्धांत यानि लॉ ऑफ अट्रेक्शन (Law of Attraction) कहते हैं। आकर्षण का सिद्धांत यह साबित करता है कि आप अपने विचारों के द्वारा जो भी कुछ प्राप्त करना चाहते हैं वह सब कुछ आपको मिल जाता है। दुनिया भर के 100 से अधिक सफल लोगों पर किए गए सर्वे ने साबित किया है कि उन्होंने जो भी सोचा वह उन्हें अवश्य मिल गया।
विचारों को साक्षी भाव से देखने के लिए ध्यान जरूरी है
भगवान गौतमबुद्ध ने विचारों को साक्षी भाव से देखने के लिए ध्यान यानि मेडिटेशन(Meditation) की विधि पूरी मानवता को प्रदान की है। मेडिटेशन(Meditation) के द्वारा आप अपने विचारों के साक्षी बनते हैं। विचारों के साक्षी बनने के बाद आपको किसी भी चीज की कमी नहीं रह जाती। आप जो भी विचार लाते हैं आपको वह सब कुछ प्राप्त हो जाता है जो आप पाना चाहते हैं। बस आपको अपने जीवन को ब्रह्मांड के साथ जोड़नाा है।
भगवान गौतमबुद्ध के विचारों को आगे बढ़ाया है ओशो ने
आध्यात्मिक गुरू ओशो की पूरी शिक्षा तथा पूरा ज्ञान ही भगवान गौतमबुद्ध के द्वारा ब्रह्मांड के साथ जुड़ाव पर आधारित है। एक उदाहरण के साथ देखें तो ओशो ने हमेशा कहा है कि जब इंसान अपने भीतर की शांति और चेतना को पहचानता है और उसे ब्रह्मांड-सत्ता से जोड़ता है, तब उसे सब कुछ मिल जाता है। ओशो का मूल विचार यह है कि ब्रह्मांड से जुडऩा किसी भौतिक स्थान या किसी विशेष अनुभव से नहीं, बल्कि अपने भीतर की चेतना के साक्षात्कार से शुरू होता है। जब व्यक्ति आत्म-चिंतन, ध्यान और मौन की कला सीखता है, तभी वह ब्रह्मांड से जुडक़र गहरे आनन्द और संतुलन को अनुभव कर सकता है। उसे वह सब कुछ मिल जाता है जो वह चाहता है। इस प्रकार यदि हम अपने अंदर चलने वाले विचारों के साक्षी बनकर ब्राह्मांड के साथ जुड़ जाते हैं तो जीवन के पूरे रहस्य को समझ जाते हैं। जीवन का यह रहस्य समझ में आते ही हमें स्वयं अनुभव होने लगता है कि वास्तव में हम इस ब्रह्मांड में फैली हुई व्यापक ऊर्जा का एक छोटा सा अंश है। एक ऐसा अंश जो कभी ना पैदा होता है और ना ही कभी मरता है। Gautama Buddha
Gautama Buddha : भगवान गौतमबुद्ध ने बेहद आसान तरीके से जीवन के बड़े रहस्य का समाधान किया है। भगवान गौतमबुद्ध के बताए गए मार्ग के द्वारा जीवन का रहस्य समझ कर कोई भी इंसान अपने जीवन को पूरी तरह से सार्थक बना सकता है। भगवान गौतमबुद्ध ने बताया है कि वास्तव में आत्मा तथा परमात्मा का पूरा खेल भ्रम है। वास्तव में ब्रह्मांड में फैली हुई ऊर्जा से ही पूरी सृष्टि का संचालन होता है। ब्राह्मांड में फैली हुई ऊर्जा को ठीक से समझ लेने तथा प्रकृति के अनुरूप व्यवहार करने से जीवन का पूरा रहस्य समझ में आ जाता है। जो इंसान ब्रह्मांड की ऊर्जा के साथ जुड़ जाता है उसे वह सब कुछ प्राप्त हो जाता है जो वह चाहता है।
जैसी करनी-वैसी भरनी किसी सजा की चेतावनी नहीं है
भगवान गौतमबुद्ध कहते हैं कि जैसी करनी- वैसी भरनी यह बात हम रोज सुनते हैं। जैसी करनी-वैसी भरनी की बात सुनते ही हमें लगने लगता है कि यह किसी सजा की घोषणा है। हमें लगता है कि जैसे कोई बैठा हुआ है जो हमारे किए गए कार्यों का हिसाब रख रहा है। वास्तव में ऐसी कोई व्यवस्था प्रकृति में नहीं है कि कोई हमारे कार्यों का हिसाब रख रहा हो। असल में ब्रह्मांड में मौजूद ऊर्जा के द्वारा ही सब कुछ संचालित होता है। जिस प्रकार कोई किसान अपने खेल में गेहूं का बीज बोने के बाद आम का पेड़ उगने की कल्पना नहीं कर सकता। उसी प्रकार कोई इंसान प्रकृति के विरूद्ध आचरण करके अपने जीवन को बेहतर बनाने की कल्पना करेगा तो गलत साबित होगा। गेहूं के बीज से कभी आम का पौधा पैदा नहीं हो सकता। इसका अर्थ यह है कि जैसा बीज बोया गया है वैसा ही फल प्राप्त होता है।
इंसान के विचार से बोया जाता है बीज
भगवान गौतमबुद्ध ने बताया है कि इंसान के अंदर चलने वाले विचारों के कंपन को ब्रह्मांड की ऊर्जा ग्रहण करती है। किसी इंसान के विचार जिस प्रकार से होते हैं उस इंसान का जीवन भी उसी प्रकार का बन जाता है। ब्रह्मांड के द्वारा इंसान के विचारों के आधार पर ही उसे सब कुछ प्रदान किया जाता है। जो इंसान अपने विचारों में प्रेम, करूणा, भाईचारा, प्रकृति से लगाव को महत्व देता है उसके जीवन में ब्रह्मांड की शक्ति सब कुछ अच्छा ही अच्छा प्रदान करती है। यहां विचारों का अर्थ आपके द्वारा बोले जाने वाले शब्दों से नहीं है बल्कि आप संमयक भाव से अपने विचारों को देखते हुए जो कुछ भी विचार पैदा करते हैं उन्हीं विचारों से आपका जीवन प्रभावित होता है। साक्षी भाव से उत्तम विचार करने वाला इंसान पूरे मन से जो भी मांगता है उसे वह सब कुछ मिल जाता है जिसकी उसने कल्पना की होती है। भगवान गौतमबुद्ध के इन विचारों का वैज्ञानिकों ने भी समर्थन किया है।
आकर्षण का सिद्धांत भी भगवान गौतमबुद्ध की बात का आधार है
हजारों साल पहले भगवान गौतमबुद्ध ने यह बात कही थी कि आप अपने साक्षी भाव में जो भी मांगते हैं प्रकृति यानि ब्रह्मांड आपको वह सब कुछ दे देता है। इस बात को आधुनिक विज्ञान ने भी स्वीकार कर लिया है। आधुनिक विज्ञान इस व्यवस्था को आकर्षण का सिद्धांत यानि लॉ ऑफ अट्रेक्शन (Law of Attraction) कहते हैं। आकर्षण का सिद्धांत यह साबित करता है कि आप अपने विचारों के द्वारा जो भी कुछ प्राप्त करना चाहते हैं वह सब कुछ आपको मिल जाता है। दुनिया भर के 100 से अधिक सफल लोगों पर किए गए सर्वे ने साबित किया है कि उन्होंने जो भी सोचा वह उन्हें अवश्य मिल गया।
विचारों को साक्षी भाव से देखने के लिए ध्यान जरूरी है
भगवान गौतमबुद्ध ने विचारों को साक्षी भाव से देखने के लिए ध्यान यानि मेडिटेशन(Meditation) की विधि पूरी मानवता को प्रदान की है। मेडिटेशन(Meditation) के द्वारा आप अपने विचारों के साक्षी बनते हैं। विचारों के साक्षी बनने के बाद आपको किसी भी चीज की कमी नहीं रह जाती। आप जो भी विचार लाते हैं आपको वह सब कुछ प्राप्त हो जाता है जो आप पाना चाहते हैं। बस आपको अपने जीवन को ब्रह्मांड के साथ जोड़नाा है।
भगवान गौतमबुद्ध के विचारों को आगे बढ़ाया है ओशो ने
आध्यात्मिक गुरू ओशो की पूरी शिक्षा तथा पूरा ज्ञान ही भगवान गौतमबुद्ध के द्वारा ब्रह्मांड के साथ जुड़ाव पर आधारित है। एक उदाहरण के साथ देखें तो ओशो ने हमेशा कहा है कि जब इंसान अपने भीतर की शांति और चेतना को पहचानता है और उसे ब्रह्मांड-सत्ता से जोड़ता है, तब उसे सब कुछ मिल जाता है। ओशो का मूल विचार यह है कि ब्रह्मांड से जुडऩा किसी भौतिक स्थान या किसी विशेष अनुभव से नहीं, बल्कि अपने भीतर की चेतना के साक्षात्कार से शुरू होता है। जब व्यक्ति आत्म-चिंतन, ध्यान और मौन की कला सीखता है, तभी वह ब्रह्मांड से जुडक़र गहरे आनन्द और संतुलन को अनुभव कर सकता है। उसे वह सब कुछ मिल जाता है जो वह चाहता है। इस प्रकार यदि हम अपने अंदर चलने वाले विचारों के साक्षी बनकर ब्राह्मांड के साथ जुड़ जाते हैं तो जीवन के पूरे रहस्य को समझ जाते हैं। जीवन का यह रहस्य समझ में आते ही हमें स्वयं अनुभव होने लगता है कि वास्तव में हम इस ब्रह्मांड में फैली हुई व्यापक ऊर्जा का एक छोटा सा अंश है। एक ऐसा अंश जो कभी ना पैदा होता है और ना ही कभी मरता है। Gautama Buddha












