Friday, 19 July 2024

बहुत जल्दी उद्योगों का प्रदेश बनेगा उत्तर प्रदेश, तेजी से हो रहा है काम

UP News : भारत का सबसे बड़ा प्रदेश उत्तर प्रदेश है। उत्तर प्रदेश के नागरिकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी…

बहुत जल्दी उद्योगों का प्रदेश बनेगा उत्तर प्रदेश, तेजी से हो रहा है काम

UP News : भारत का सबसे बड़ा प्रदेश उत्तर प्रदेश है। उत्तर प्रदेश के नागरिकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। उत्तर प्रदेश वालों के लिए अच्छी खबर यह है कि उत्तर प्रदेश बहुत जल्दी उद्योगों का प्रदेश बन जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में औद्योगिक करण का काम तेजी के साथ शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार के काम के सकारात्मक नतीजे भी सामने आने लगे हैं।

इस प्रकार उत्तर प्रदेश बनेगा उद्योगों का प्रदेश

उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में स्थापित एक्सप्रेस-वे के किनारों पर औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना कर रही है। उत्तर प्रदेश सरकार का प्रयास यह है कि उत्तर प्रदेश में इतने अधिक उद्योग स्थापित कर दिए जाएं कि उत्तर प्रदेश उद्योगों का प्रदेश बन जाए। उत्तर प्रदेश सरकार की इस विशेष योजना के तहत प्रदेश के पांच प्रमुख एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजना बनाई गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में तेज औद्योगिक करण के लिए जमीन के अधिग्रहण का काम शुरू कर दिया है। इस काम की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास विभाग (यूपीसीडा) को सौंपी गयी है।

सात हजार करोड़ रूपए में खरीदेगी जमीन

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उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास विभाग (यूपीसीडा) के CEO  मयूर माहेश्वरी हैं। यूपीसीडा के CEO. मयूर माहेश्वरी ने बताया है कि प्रदेश के पांच एक्सप्रेसवे के किनारे 29 जिलों में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं। यूपीडा को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। एक्सप्रेसवे के किनारे बनने वाले कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण पर 7300 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस रकम से 5568 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण तेजी से किया जा रहा है। करीब 1700 हेक्टेयर जमीन ले ली गई है। इसकी रफ्तार से साफ है कि प्रदेश के लिए औद्योगिक विकास का ‘एक्सप्रेसवे’ जल्द मूर्त रूप लेगा।
उत्तर प्रदेश में गंगा एक्सप्रेस वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे, पूर्वांचल एक्सप्रेस वे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे के किनारे इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं। ये कॉरिडोर इन पांच एक्सप्रेस वे से लगे 29 जिलों में विकसित होने हैं। सबसे ज्यादा 11 औद्योगिक शहर कॉरिडोर गंगा एक्सप्रेस वे के किनारे बसेंगे। दूसरे नंबर पर 6 औद्योगिक शहर बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे और पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के किनारे विकसित होंगे। तीसरे नंबर पर चार शहरों के साथ आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे है। गोरखपुर में दो औद्योगिक शहरों को विकसित किया जाएगा। 23 जिलों के 84 गांवों को पहले ही अधिसूचित कर किया जा चुका है। इन औद्योगिक शहरों में फार्मा पार्क, टेक्सटाइल पार्क, वेवर उपकारस, देवमस्टिक, इलेक्ट्रॉनिका प्रसंस्करण, लोजिरी, फूड प्रोसेसिंग, दुग्ध सरकार होजरी, आईटी पार्क, भारी उद्योगों और मशीनरी यूनिटों को बसाया जाएगा

गंगा पर होगा सबसे तेज विकास

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उत्तर प्रदेश के गंगा एक्सप्रेसवे से सटे मेरठ, हापुड़, अमरोहा, सम्भल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज के नजदीक कॉरिडोर बसाए जाएंगे। इन शहरों की 1371.90 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। इसमें 1290 हेक्टेयर निजी क्षेत्र से और 81.90 हेक्टेयर सरकारी जमीन ली जाएगी। कुल बजट 2345 करोड़ रुपये का है। अभी तक यूपीडा ने 672 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण कर लिया है।

बुंदेलखंड में भी लगेंगे उद्योग

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उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे पर छह औद्योगिक शहर बसाए जाएंगे। ये औद्योगिक शहर चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर, महोबा, जालौन और औरैया में विकसित किए जाएंगे। इन छह जिलों की 1911 हेक्टेयर जमीन पर कॉरिडोर बनेंगे। इसमें 1843.75 हेक्टेयर जमीन निजी सेक्टर से और 67.25 हेक्टेयर सरकारी क्षेत्र की ली जा रही है। जमीन की खरीद पर 1926 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। अभी तक 534 हेक्टेयर जमीन खरीदी जा चुकी है।

पूर्वांचल में भी तेज विकास

उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर छह औद्योगिक शहर बस रहे हैं। इन्हें लखनऊ, बाराबंकी, अमेठी, सुल्तानपुर, गाजीपुर और अपने ककरनगर में विकसित किया जाना/ है। इन छह जिलों की 1470 हेक्टेयर जमीन को लिया जा रहा है। कुल बजट 2307 करोड़ से ज्यादा है। अभी तक 358 हेक्टेयर जमीन ली जा चुकी है।

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